पंजाब के किसान खड़ी फसल में ट्रैक्टर चलाने को मजबूर

चंडीगढ़, पंजाब में ट्रकों में भर कर मजदूर और श्रमिक लाखों की तादाद में अपने गृह राज्यों की ओर लौट रहे हैं. ट्रांसपोर्ट, कर्फ्यू और लॉकडाउन की वजह से राज्यबंदी होने के बाद पंजाब के किसान खेतों में तैयार सब्जी की फसलों पर ट्रैक्टर चलाने को मजबूर हो गए हैं.

लॉकडाउन और कर्फ्यू की वजह से जहां लोग अपने घरों में बंद है तो वहीं गलियों में तमाम सब्जी और ठेले वालों की आवाजाही आम हो गई है. लोगों को महंगे दामों में सब्जियों की खरीदारी करनी पड़ रही है. पंजाब के किसान उन्हीं सब्जियों को मजबूरी के चलते ट्रैक्टर से तबाह करने में जुटे हुए हैं.

किसानों का सब्जियों की पैदावार में प्रति एकड़ 80 हजार से 90 हजार तक का खर्चा आता है. उसके बाद सब्जियों को तोड़ने के लिए बड़ी संख्या में मजदूरों की जरूरत पड़ती है. फिर इस सब्जी को ट्रक या ट्रैक्टरों में भर के मंडियों में पहुंचाया जाता है.

फिलहाल ना किसान को ट्रांसपोर्ट मिल रहा है ना ही मजदूर. मंडियों के भी बंद होने से किसानों की कमर टूट रही है. जो व्यापारी खेतों में सब्जियां खरीदने आते थे उनका भी आना बंद हो गया है. लिहाजा किसान तैयार सब्जी की फसल को खेतों में ट्रैक्टर से जोत रहा है.

किसानों को नहीं मिल रही कीमत

दरअसल जो सब्जियां लोगों को रेहड़ी और ठेले वाले 20 से 40 रुपये प्रति किलो तक बेच रहे हैं, उन्हीं सब्जियों की किसान को कीमत दो से ढाई रुपए प्रति किलोग्राम तक मिल रही है. वह भी तब जब किसान को बड़ी तादाद में लेबर ट्रांसपोर्टेशन और खुली मंडियां मिलें. लिहाजा किसानों ने फैसला लिया है कि वे अपनी फसलों को जिसमें प्रति एकड़ 80 हजार से 90 हजार रुपये तक का खर्चा हुआ है, उनको खेत में ही जोत देंगे. क्योंकि सब्जियां घाटे का सौदा हो रही हैं.

मजदूरों की कमी से जूझ रहा पंजाब

अगर हालात ऐसे ही रहे तो आने वाले समय में ना सिर्फ सब्जियों की किल्लत होगी बल्कि सब्जियों के दाम भी आसमान को छू सकते हैं. किसान को मंडियों तक सब्जी पहुंचाने के लिए ट्रांसपोर्टेशन के दाम डबल हो चुके हैं. लेबर की कमी की वजह से मजदूरों ने भी अपनी दैनिक दिहाड़ी डबल कर दी है. लिहाजा किसान आने वाले समय में सब्जी की फसलों को बोने से ही परहेज करेगा. (आज तक)