वेन्टीलेर पर पड़ा, बन्द होने के कगार पर सर्कस

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देहरादून (दीपक सैलवाल)। जैमिनी सर्कस 22 मई से देहरादून परेड ग्राउंड में लगा है,लेकिन दर्शक सर्कस का रुख नही कर रहे हैं।क्योंकि जानवरो के ना आने से सर्कस की मांग कम हो गई है,श्याम सिंह थापा ने कहा कि सर्कस के खर्चे बहुत है लेकिन जबकि पूरे दिन में एक दिन का भी खर्च नही निकल पाता और केंद्र सरकार से लेकर राज्य सरकारें भी इस और ध्यान नही दे रही हैं जबकि सर्कस में 100 से 150 लोगों का स्टाफ काम करता है,जिससे सबका परिवार पलता है।अगर सर्कस बन्द होता है तो सबके परिवार सड़क पर आजायेंगे।

और भूखे मरने के नोबत आजायेगी। श्याम सिंह थापा ने कहा कि सर्कस के कलाकार अपनी जान पर खेल कर दर्शकों का मनोरंजन करते हैं।और उनको सिर्फ अपनी कला पर दर्शको की तालियों की आवाज से ही खुशी मिलती है।वहीं कई दर्शको से हमने बात की जैसे विधानसभा में अधिकारी पद पर हैं, राजेन्द्र चौधरी का कहना है कि सर्कस हम परिवार सहित देखने आये हैं सर्कस देखकर बहुत खुशी हुई कि सर्कस एक लाईव मनोरजन का खेल है जिसमे कलाकार अपनी जान पर खेल कर दर्शकों का मनोरंजन करते हैं।

उन्होंने कहा कि सरकार को इनको आगे बढ़ाने के लिये पहल करनी चाहिए।वहीं दूसरी और एक दर्शक ममता सेलवान ने बताया कि पहले जब हम छोटे-छोटे अपने मम्मी पापा के साथ सर्कस देखने आते थे तो उसमें हाथी,शेर,कुत्ते,घोड़े,और बहुत से जानवरो का खेल दिखाते थे।लेकिन अब वो सब नही है अब अपने बच्चों को बताते है तो उनको ये सब देखने को नही मिलता तो नाराज होते हैं।

छोटे दर्शक आरती,पीयूष,तुषार,ने कहा कि सर्कस बहुत अच्छा है और कलाकरो ने जो भी आईटम दिखाये हैं सबने खुब हंसाया, जब भी देहरादून में सर्कस लगता है हम जरूर देखते हैं।कई दर्शको ने कहा कि सरकार को सर्कस के बारे में सोचना चाहिए।