जिन लोगों को ह्दय रोगों का खतरा रहता है, उनके ब्‍लड प्रेशर को कम करने में अखरोट मददगार हो सकता है

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नये पेन स्‍टेट अध्‍ययन के अनुसार, यदि निम्‍न सैचुरेटेड वसा वाले भोजन के साथ वॉलनट या अखरोट लिया जाये तो इससे उन लोगों के ब्‍लड प्रेशर को कम करने में मदद मिलती है, जिन्‍हें कार्डिवेस्‍कुलर डिजीज का खतरा रहता है। असिलसिलेवार रूप से नियंत्रित अध्‍ययन में, शोधकर्ताओं ने प्रतियोगियों के भोजन में कुछ सैचुरेटेड वसा हटाकर उसकी जगह अखरोट को शामिल करने के प्रभाव का परीक्षण किया। उन्‍होंने पाया कि जब प्रतियोगियों ने रोजाना कम मात्रा वाले सैचुरेटेड वसा के साथ अखरोट खाया तो उनका सेंट्रल ब्‍लड प्रेशर निम्‍न था।

शोधकर्ताओं के अनुसार, सेंट्रल प्रेशर वह प्रेशर होता है जोकि ह्दय जैसे अंगों पर जोर डालता है। यह ब्‍लड प्रेशर को मापता है, जैसे हाथ में पारंपरिक तरीके से ब्‍लड प्रेशर को नापा जाता है। इससे व्‍यक्ति को कार्डियोवेस्‍कुलर डिजीज (सीवीडी) होने के खतरे के बारे में जानकारी मिलती है। पेन स्‍टेट में न्‍यूट्रिशन के प्रतिष्ठित प्रोफेसर पेनी क्रिस-एथरटन ने कहा कि अखरोट की वजह से प्रतिसादियों का सेंट्रल प्रेशर कम होने से, उनमें सीवीडी होने का खतरा भी कम हो सकता है।

क्रिस-एथरटन ने कहा, ‘’जब प्रतिसादियों ने पूरा अखरोट खाया तो उन्‍हें इसी तरह के फैटी एसिड प्रोफाइल से युक्‍त भोजन लेने की तुलना में ज्‍यादा लाभ मिला, क्‍योंकि अखरोट खुद में एक नट है।‘’इसलिये, ऐसा जान पड़ता है कि अखरोट में कुछ अतिरिक्‍त है जोकि फायदेमंद है, यह शायद उनका बायोएक्टिव कम्‍पाउंड हो सकता है, उनमें मौजूद फाइबर या फिर कुछ और हो सकता है- जोकि आपको सिर्फ फैटी एसिड से नहीं मिल सकता है।‘’
डॉ. क्रिस एथरटन के लैब की नई स्‍टूडेंट और न्‍यूट्रिशिन में हाल ही में पीएचडी करने वाली एलिसा टिंडल ने कहा कि यह अपने तरह का पहला अध्‍ययन है जिसमें इस बात का पता लगाने की कोशिश की गयी है कि अखरोट का कौन-सा हिस्‍सा दिल की सेहत के लिये लाभकारी होता है।

टिंडल कहती हैं, ‘’अखरोट में अल्‍फा-लिनोलेनिक एसिड, एएलए होता है। यह पौधों से प्राप्‍त होने वाला ओमेगा 3 है जोकि ब्‍लड प्रेशर पर सकारात्‍मक प्रभाव डाल सकता है। हम यह देखना चाहते थे कि क्‍या एएलए दिल की सेहत को लाभ पहुंचाने वाला मुख्‍य सहयोगी है या फिर यह अखरोट का अन्‍य बायोएक्टिव तत्‍व, जैसे पॉलीफेनॉल है। हमने इस अध्‍ययन को इस बात का पता लगाने के लिये डिजाइन किया था कि इन तत्‍वों का अतिरिक्‍त लाभ है या नहीं।‘’
इस अध्‍ययन के लिये शोधकर्ताओं ने 45 प्रतियोगियों को शामिल किया था जिनका वजन ज्‍यादा था या फिर जो मोटे थे। उनकी उम्र 30 से 65 साल के बीच थी। अध्‍ययन शुरू करने से पहले प्रतियोगियों को दो हफ्तों के लिये ‘’रन-इन’’ डाइट पर रखा गया था।‘’

टिंडल कहती हैं, ‘’अध्‍ययन शुरू करने से दो हफ्ते पहले सबको एक ही डाइट पर रखने से समान स्‍तर पर रखने में मदद मिली। उस ‘रन-इन’ डाइट में उनके सैचुरेटेड वसा से 12 प्रतिशत कैलोरी को शामिल किया गया, जोकि सामान्‍य अमेरिकन डाइट के बराबर है। इस तरह, जब प्रतिसादियों को स्‍टडी डाइट पर रखा गया था तो हमें यह पता था कि अखरोट या अन्‍य तेलों से सैचुरेटेड फैट को रिप्‍लेस कर दिया गया है।‘’

‘रन-इन’ डाइट के बाद, प्रतिसादियों को असिलसिलेवार रूप से तीन स्‍टडी डाइट में से एक के लिये चुना गया, जिनमें ‘रन-इन’ डाइट की तुलना में कम सैचुरेटड वसा शामिल थी। उन डाइट्स में से एक में साबुत अखरोट था, दूसरे में अखरोट के बिना कुछ मात्रा एएलए और पॉलीसैचुरेटेड फैटी एसिड की थी और एक और डाइट में आंशिक रूप से प्रतिस्‍थापित किया गया ऑलिएक एसिड (अन्‍य फैटी एसिड) उतनी ही मात्रा में शामिल किया गया था, जितना कि एएलए अखरोट में पाया जाता है, बिना अखरोट के।

तीनों डाइट में रन-इन डाइट के पांच प्रतिशत सैचुरेटेड वसा की मात्रा को अखरोट या वेजिटेबल ऑयल से प्रतिस्‍थापित किया गया और सभी प्रतिसादियों ने डाइट अवधि के बीच अंतराल के साथ 6 महीने के लिये प्रत्‍येक डाइट का पालन किया। हर डाइट अवधि के पालन के दौरान, शोधकर्ताओं ने कुछ कार्डियोवेस्‍कुलर खतरों का अध्‍ययन किया, जिनमें सेंट्रल सिस्‍टॉलिक और डिस्‍टॉलिक ब्‍लड प्रेशर, ब्रेकियल प्रेशर, कोलेस्‍ट्रॉल और धमनी की कठोरता शामिल है।
शोधकर्ताओं ने पाया कि सारे ट्रीटमेंट डाइट के दौरान कार्डियोवेस्‍कुलर परिणामों पर सकारात्‍मक प्रभाव पड़ता है, जिस डाइट में साबुत अखरोट था उससे काफी ज्‍यादा लाभ मिला, जिसमें सेंट्रल डायस्‍टॉलिक ब्‍लड प्रेशर का कम होना शामिल है। ब्रेकियल प्रेशर के विपरीत जोकि आपके ह्दय की विपरीत दिशा पर दबाव डालता है और डॉक्‍टर के ऑफिस में आर्म कफ से मापा जाता है, वहीं सेंट्रल प्रेशर ऐसा प्रेशर है जोकि आपके ह्दय की तरफ दबाव डालता है। टिंडल कहती हैं कि हाल ही में ‘जर्नल ऑफ द अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन’ में प्रकाशित परिणामों में सैचुरेटेड वसा को सेहतमंद विकल्‍पों के साथ प्रतिस्‍थापित करने के महत्‍व को दर्शाया गया है।

टिंडल कहती हैं, ‘’एक औसत अमेरिकन डाइट में 12 प्रतिशत सैचुरेटड वसा होती है और हमारी ट्रीटमेंट डाइट में कुल मिलाकर सात प्रतिशत, उनमें अखरोट या वेजिटेबल ऑयल्‍स को रिप्‍लेसमेंट के तौर पर प्रयोग किया गया। इसलिये, उन तीनों डाइट के सकारात्‍मक लाभ से यह पता चलता है कि सैचुरेटेड वसा को आप अखरोट या वेजिटेबल ऑयल जैसे अनसैचुरैटेड वसा से रिप्‍लेस करने के दौरान आपको उसके कार्डियोवेस्‍कुलर फायदों पर जरूर नज़र डालनी चाहिये।‘’
क्रिस-एथरटन ने कहा कि यह स्‍टडी दिल की सेहत को लाभ पहुंचाने वाली डाइट को शामिल करने के फायदों का समर्थन करती है।

क्रिस एथरटन ने कहा, ‘’स्‍नैक के तौर पर फैटी रेड मीट या फुल फैट डेयरी प्रोडक्‍ट लेने की बजाय, थोड़े स्किम मिल्‍क और अखरोट ले लें। मुझे ऐसा लगता है कि हम जो खाते हैं, उससे ही ज्‍यादा से ज्‍यादा लाभ लेने की कोशिश कर सकते हैं, खासतौर से किस तरह हम अपने खाने में से थोड़ी कमी कर सकते हैं। ऐसे में अखरोट सैचुरेटेड वसा का अच्‍छा विकल्‍प हो सकता है।‘’