धाद लोक भाषा एकांश की मासिक गोष्ठी, गढ़वाली कुमाऊनी कविताओं के साथ सम्पन्न

11

देहरादून, धाद लोक भाषा एकांश की मासिक बैठक धाद कार्यालय चुक्खुवाला मां श्रीमती बीना कंडारी जी की अध्यक्षता मा ह्वे। गोष्टी मा बाल कविताओं पर चर्चा ह्वे। गोष्ठी में लोक भाषा एकांश का कुछ बिंदुओं पर चर्चा का बाद हर मीटिंग की तरों गढ़वाली कुमाऊनी कविताओं को पाठ करेगी आज कविता पाठ की शुरुआत श्री लक्ष्मण सिंह रावत जीन करें की कविता, एक जोड़ी कै जुड़ जंदन, एक टुटी कै टुट जंदन। शांति बिंजोला की कविता, मी गढ़वाली छौं मेरी मयली पच्छाण हरचणी दूध बोली मेरी कनक्वे बचाना । सुमित्रा जुगराज जी की कविता शहीद पत्नी , मि सहीद की पत्नी छौं दूसरू ब्यो करी अपड़ी पच्छयाण नि खोण चांदो। श्री चंद्रशेखर तिवारी जी न कविता पढ़ी इजा, कि म्यर पोथिलो तुम जी रयां बचि रयां और तुमर खुट कान कमै झन बुडो़ झन छितरी रयां तुम कमै लै इतके उथके त मडुवैकि बालडिक चार। शांति प्रकाश जिज्ञासु जी कि कविता बारा मैनों का बाद बग्वाली तिवार ऐगी ईं बग्वाल मा घौर ऐली क्या तेरा बाना ज्यू खुद्यू च लाटा वे थै जरा बुथैली क्या । श्रीमती प्रेमलता सजवाण न गजल सुणे घाम चटकताल भिज्यि जिकुड़ी दिखै द्यू । अध्यक्ष श्रीमती बीना कंडारी अध्यक्षीय भाषण का दगड़ा कविता बी सुणे अर सबयूं कु आभार व्यक्त करि। यह अवसर पर विशेष अतिथि श्री चंद्रशेखर तिवारी, लक्ष्मण सिंह रावत, सचिव प्रेमलता सजवान , रमाकांत बेनीवाल , सुमित्रा जुगलान, मनोज भट्ट गढ़वाली, हरीश कंडवाल, शांति अमोली बिंजोला, शान्ति प्रकाश जिज्ञासु उपस्थित । ये अवसर पर रमाकांत बेंजवाल जीन देवेंद्र जोशी जी की कविता सुणे ।