हिंदी फिल्मों के बेहतरीन अदाकारा मीना कुमारी का आज जन्मदिन, धर्मेंद्र की बेवफाई, ज्यादा शराब पीने से लिवर सिरोसिस। पढ़ें मीणा कुमारी के अनसुने राज।

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गूगल ने आज अपने डूगल में मीना कुमारी को याद किया है। आज ही के दिन यानी 1 अगस्त 1933 को उनका जन्म हुआ था.

मीना कुमारी ने अपने फ़िल्मी करियर में उन्होंने एक से बढ़कर एक किरदार निभाए. फ़िल्मी भूमिकाओं की वजह से उन्हें ‘ट्रेजिडी क्वीन’ तक की उपाधि दी गई. वैसे ट्रेजिडी मीना के जीवन का दूसरा पहलू भी रहा है. मीना कुमारी की निजी जिंदगी भी सिनेमाई किरदारों की तरह त्रासदपूर्ण थी. उन्हें पारिवारिक संघर्ष से गुजरना पड़ा, शादी के बाद पति से रिश्ते बहुत अच्छे नहीं बन पाए और तो और प्रेम में भी निराशा और दर्द ही हाथ आया. प्रेम में इस टूटन का असर उनकी निजी जिंदगी पर साफ़ पड़ा. इसका दर्द उनकी शायरियों में देखा जा सकता है. मीना कुमारी के पिता एक पारसी थिएटर में हार्मोनियम बजाते थे, म्यूजिक सिखाते थे और उर्दू शायरी भी लिखा करते थे. पिता अली बक्श ने ‘ईद का चांद’ जैसी कुछ छोटे बजट की फिल्मों में एक्टिंग की और ‘शाही लुटेरे’ जैसी फिल्मों में संगीत भी दिया. मीना कुमारी की मां उनके पिता की दूसरी बीवी थीं और वे स्टेज डांसर थीं.

पैदा होते ही मीना कुमारी के पिता, उन्हें अनाथ आश्रम छोड़ आए थे. उनकी मां के काफी रोने-धोने पर वे उन्हें वापस ले आए. मीना कुमारी 1939 में फिल्म निर्देशक विजय भट्ट की फिल्म फ़रज़न्द-ए-वतन में चाइल्ड कलाकार के रूप में नज़र आईं. 1940 की फिल्म ‘एक ही भूल’ में विजय भट्ट ने इनका नाम बेबी महजबीं से बदल कर बेबी मीना कर दिया. 1946 में आई फिल्म ‘बच्चों का खेल’ से बेबी मीना 14 वर्ष की आयु में मीना कुमारी बनीं.

1952 में मीना कुमारी ने फिल्म निर्देशक कमाल अमरोही के साथ शादी कर ली. मीना कुमारी ने ये शादी अपने परिवार के खिलाफ जाकर किया था. हालांकि शादी के 12 साल बाद 1964 में ही मीना कुमारी और कमाल अमरोही की शादीशुदा जिंदगी में दरार आ गई और वो अलग-अलग रहने लगे. मीना ने 29 मार्च, 1972 को आखिरी बार कमाल अमरोही का नाम लिया, इसके बाद वह कोमा में चली गईं.

1966 में फिल्म ‘काजल’, 1963 में ‘साहिब बीवी और गुलाम’, 1954 में ‘बैजू बावरा’, 1955 में ‘परिणीता’ के लिए फिल्मफेयर सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री पुरस्कार से सम्मानित किया गया. उस दौर की बॉलीवुड गॉसिप्स के मुताबिक धर्मेंद्र की जिंदगी का अकेलापन दूर करते-करते मीना उनके करीब आने लगीं. दोनों के बारे में अफेयर की काफी चर्चा होने लगी. मीना कुमारी के रूप में धर्मेंद्र के करियर की डूबती नैया को किनारा मिल गया था और धीरे-धीरे धर्मेंद्र के करियर ने भी रफ्तार पकड़ी.आखिरकार ‘पाकीजा’ फरवरी 1972 में रिलीज हुई और बॉक्स ऑफिस पर इसे दर्शकों का प्यार नहीं मिला, लेकिन 31 मार्च 1972 को मीना कुमारी की अचानक मौत के बाद फिल्म ने रफ्तार पकड़ी और ये सुपरहिट साबित हुई. फिल्मों में काम करने के बावजूद मीना कुमारी का फिल्मों से रिश्ता हमेशा लव-हेट का रहा. अभिनेत्री के साथ ही वो एक अच्छी उर्दू शायरा भी थीं. उन्होंने अपनी शायरी की ‘आई राइट, आई रिसाइट’ नाम से ख्याम के साथ रिकॉर्ड भी कीं.

फिल्मी दुनिया में इतना नाम कमाने के बाद मीना कुमारी अपनी मौत से पहले एक बार फिर उसी हालात में पहुंच गई थीं, जिन तंगहाली के हालात में उनके जन्म के समय उनके माता-पिता थे. कहा जाता है कि जब मीना कुमारी की एक नर्सिंग होम में मृत्यु हुई तो अस्पताल का बिल चुकाने तक के पैसे नहीं थे.

अपनी शोहरत के बल पर मीना कुमारी ने धर्मेंद्र के करियर को ऊंचाइयों तक ले जाने की पूरी कोशिश की, लेकिन इतना सब करने के बाद भी मीना को धर्मेंद्र से भी बेवफाई ही मिली. फिल्म ‘फूल और कांटे’ की सफलता के बाद, धर्मेंद्र ने मीना कुमारी से दूरियां बनानी शुरू कर दीं और एक बार फिर से मीना कुमारी अपनी जिंदगी में तन्हा रह गईं. कहा जाता है कि धर्मेंद्र की बेवफाई को मीना झेल न सकीं और हद से ज्यादा शराब पीने लगीं. इस वजह से उन्हें लिवर सिरोसिस बीमारी हो गई. कहा तो ये भी जाता है कि धर्मेंद्र एक दफा मीना कुमारी को सबके सामने थप्पड़ मार दिया था. बेवफाई में मिले इस थप्पड़ को मीना कभी भूल नहीं पाईं. हालांकि, आख़िरी वक्त में मीना कुमारी की इस हालत के लिए धर्मेंद्र कितने जिम्मेदार थे इस बारे में बहुत कुछ साफ़ नहीं है.

आखिरकार ‘पाकीजा’ फरवरी 1972 में रिलीज हुई और बॉक्स ऑफिस पर इसे दर्शकों का प्यार नहीं मिला, लेकिन 31 मार्च 1972 को मीना कुमारी की अचानक मौत के बाद फिल्म ने रफ्तार पकड़ी और ये सुपरहिट साबित हुई. फिल्मों में काम करने के बावजूद मीना कुमारी का फिल्मों से रिश्ता हमेशा लव-हेट का रहा. अभिनेत्री के साथ ही वो एक अच्छी उर्दू शायरा भी थीं. उन्होंने अपनी शायरी की ‘आई राइट, आई रिसाइट’ नाम से ख्याम के साथ रिकॉर्ड भी कीं.

फिल्मी दुनिया में इतना नाम कमाने के बाद मीना कुमारी अपनी मौत से पहले एक बार फिर उसी हालात में पहुंच गई थीं, जिन तंगहाली के हालात में उनके जन्म के समय उनके माता-पिता थे. कहा जाता है कि जब मीना कुमारी की एक नर्सिंग होम में मृत्यु हुई तो अस्पताल का बिल चुकाने तक के पैसे नहीं थे.