मायावती ने भीम आर्मी चीफ चंद्रशेखर आजाद को क्यों किया खारिज?

सहारनपुर की जेल में 16 माह तक बंद रहे भीम आर्मी चीफ चंद्रशेखर ने बाहर निकलते ही मायावती को बुआ कहा. लेकिन अगले ही दिन बसपा सुप्रीमो ने उन्हें यह कहकर खारिज कर दिया कि सहारनपुर हिंसा में आरोपी चंद्रशेखर से उनका कोई रिश्ता नहीं है. समाज में ऐसे बहुत से संगठन बनते चले आ रहे हैं जो अपना धंधा चलाते हैं. अब सवाल ये उठता है कि आखिर मायावती ने चंद्रशेखर को क्यों तवज्जो नहीं दी? क्या उन्हें भीम आर्मी के उभार से खासतौर पर पश्चिमी यूपी में अपनी सियासी जमीन खोने जैसा कोई डर है?

दरअसल, मायावती एक ऐसी पार्टी चीफ के तौर पर जानी जाती हैं जो अपने आसपास बड़ा नेता नहीं पनपने देतीं. वह लंबे समय से एससी/एसटी और दबे-कुचले वर्ग में राजनीतिक उत्कर्ष का सबसे बड़ा प्रतीक हैं. इसलिए अपनी पार्टी में भी क्षेत्रीय नेता पैदा करने तक से परहेज करती हैं कि कहीं जिस वर्ग का वह नेतृत्व करती हैं उसे कोई विकल्प न मिल जाए. ऐसे में वो अपने गढ़ में अपनी पार्टी से अलग किसी एससी नेता के उदय को कैसे देख सकती हैं. इसीलिए उन्होंने न तो अब तक जिग्नेश मेवाणी को तवज्जो दी और न ही चंद्रशेखर को देना उचित समझा.

मायावती को लगता है कि यूपी में एसी वोटों पर उनका एकाधिकार है. उनके अलावा ऐसा कोई नहीं है जिस पर यह वर्ग भरोसा कर पाए. इसके उलट सीएसडीएस के मुताबिक 2014 के चुनाव में करीब 24 फीसदी एससी मतदाताओं ने बीजेपी को वोट किया था. दूसरी ओर चंद्रशेखर के साथ वो एससी युवा जुड़े हुए हैं जो सोशल मीडिया को अपनी लड़ाई का हथियार मानते हैं. मायावती की पार्टी नए जमाने की मीडिया से दूर पारंपरिक प्रचार के तरीकों पर विश्वास करती है. राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि इससे मायावती को डर है. बसपा प्रमुख को डर है कि कहीं उनके नाम के सहारे कोई उनके बने बनाए वोटबैंक में सेंध न लगा ले.

मायावती पर ‘बहनजी: द राइज एंड फॉल ऑफ मायावती’ नामक किताब लिखने वाले अजय बोस कहते हैं, “बसपा के राजनीतिक उदय के समय उसमें कई राज्यों के दलितों ने अपना नेता खोजा था, हालांकि मायावती ने न तो ध्यान दिया और न ही कांग्रेस और बीजेपी की तरह क्षेत्रीय नेता पैदा किए जिनके सहारे उनकी राजनीति राष्ट्रीय स्तर पर आगे बढ़ सकती थी. उन्हें इस वर्ग में किसी और नेता के उदय से खुद को सियासी खतरा लगता था. इसीलिए उन्होंने कांशीराम के वक्त वाले नेताओं को भी पनपने का मौका नहीं दिया.”