मानव सुरक्षा के लिए सेना ने चलाया सबसे बड़ा ऑपरेशन

ऊधमसिंह नगर। बाराबंकी आर्मी के बम निरोधक दस्ते ने देश के विभिन्न हिस्सों में कई ऑपरेशन किए, लेकिन युद्ध क्षेत्र से बाहर मानव सुरक्षा के लिए चलाया गया ऑपरेशन 555 पतरामपुर अब तक का सबसे बड़ा ऑपरेशन है। हालांकि दस्ते के नाम कई छोटे-छोटे ऑपरेशन हैं, मगर पतरामपुर में निकली मिसाइलों को नष्ट करने का यह पहला बड़ा ऑपरेशन होने से पतरामपुर का नाम इतिहास में दर्ज हो जाएगा। ऑपरेशन पर नजर रखने को सेना के कर्नल भी जसपुर आ गए हैं।
पतरामपुर के ग्राम हजीरों में मिसाइलों को नष्ट करने का ऑपरेशन 555 पतरामपुर सेना का बम निरोधक दस्ता चलाए है। कैप्टन विकास मलिक ने बताया कि वर्ष 2016-17 में जम्मू कश्मीर में 55 अलग-अलग स्थानों पर क्रास बार्डर फायरिंग के दौरान बमों को डिस्पोज किया था। नागरिकों की जान भी बचाई थी। कई बार जान पर बन आती थी। कैप्टन ने बताया कि लुधियाना एवं दिल्ली के तुगलकाबाद में भी ऐसे ही ऑपरेशन किए हैं। पतरामपुर जैसा बड़ा ऑपरेशन वह पहली बार कर रहे हैं। जहां बड़ी मिसाइलें हैं। इनको डिस्पोज करना टेढ़ी खीर है। आसपास के इलाके एवं जंगली क्षेत्र को ध्यान में रखते हुए ऑपरेशन किया रहा है। सात या आठ दिन लगातार ऑपरेशन चलाने पर ही मिसाइलें नष्ट हो सकेंगी। बताया कि पहले दिन 220 तो दूसरे दिन तीस एवं रविवार को बीस बड़ी एवं छोटी मिसाइलों को नष्ट किया गया है।
वर्ष 1988 से लेकर 1993 तक पतरामपुर क्षेत्र आतंकवादियों की शरण स्थली के रूप में काफी चर्चित रहा है। आतंकियों से निपटने को पुलिस चौकी का निर्माण किया गया था। बताते हैं कि उस दौरान नामी बलविंदर सिंह बिंदा, हीरा सिंह आदि आतंकियों का इस क्षेत्र में राज था। लोग उनके डर से जंगलों में ही उनका खाना पहुंचाते थे। ग्राम हजीरो, कृपाचार्यपुर, सीपिका, पतरामपुर, पतरामपुर वन क्षेत्र आदि में आंतकवादी अपनी गतिविधियों को संचालित करते थे। ग्रामीणों की मदद, पुलिस एवं पीएसी के समन्वय से एक साल के भीतर आतंकवादियों का सफाया कर दिया गया था।
फीका में मिसाइलों को नष्ट कर रहे दस्ते ने अपना ठिकाना हेमपुर में बनाया है। वह रोजाना सुबह-शाम को हेमपुर से आते-जाते हैं। कैप्टन मलिक ने बताया कि हेमपुर में मोबाइल नेटवर्क की दिक्कतें आ रही हैं। इससे उन्हें कई परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
कैप्टन मलिक ने बताया कि जम्मू कश्मीर में कई बार पाक सीमा के पास मोर्टार सेल नष्ट करने के दौरान हुए धमाकों को सुनकर पाक सैनिक फायरिंग करने लगते थे। उस दौरान उन्हें अपनी जान बचाकर भागना पड़ता था। बताया कि उनके ऑपरेशन से न केवल गांव बचाये, बल्कि नागरिकों ने भी राहत की सांस ली।परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
कैप्टन मलिक ने बताया कि जम्मू कश्मीर में कई बार पाक सीमा के पास मोर्टार सेल नष्ट करने के दौरान हुए धमाकों को सुनकर पाक सैनिक फायरिंग करने लगते थे। उस दौरान उन्हें अपनी जान बचाकर भागना पड़ता था। बताया कि उनके ऑपरेशन से न केवल गांव बचाये, बल्कि नागरिकों ने भी राहत की सांस ली।