लद्दाख के डेमचोक सेक्टर में चीन ने नहीं की है कोई घुसपैठ: बिपिन रावत

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नई दिल्ली। सेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत ने शनिवार को कहा कि लद्दाख के डेमचोक सेक्टर में चीन ने कोई घुसपैठ नहीं की है। जनरल रावत का यह बयान इन रिपोर्टों के बीच आया है कि चीनी जवानों ने छह जुलाई को दलाई लामा के जन्मदिवस के मौके पर कुछ तिब्बतियों द्वारा तिब्बती झंडे फहराए जाने के बाद पिछले सप्ताह वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पार की। चीनी अपनी मानी जाने वाली वास्तविक नियंत्रण रेखा पर आते हैं और गश्त करते हैं… हम उन्हें रोकते हैं। कई बार स्थानीय स्तर पर जश्न समारोह होते हैं। डेमचोक सेक्टर में हमारी ओर तिब्बती जश्न मना रहे थे। इसके आधार पर, कुछ चीनी यह देखने आए कि क्या हो रहा है, लेकिन कोई घुसपैठ नहीं हुई। सब सामान्य है।
भारत और चीन के बीच एक विवादित सीमा रेखा है और दोनों देशों की सेनाओं के बीच डोकलाम में 2017 में 73 दिनों तक गतिरोध की स्थिति बनी रही थी। डोकलाम गतिरोध के 2 साल बाद चीन की सेना ने एक बार फिर से भारतीय क्षेत्र में घुसपैठ की है।

चीन की पीपल्स लिबरेशन आर्मी ने कुछ दिन पहले जम्मू-कश्मीर के लद्दाख में पूर्वी डेमचोक इलाके में 6 किलोमीटर अंदर तक घुसपैठ की और अपना झंडा फहराया। चीन की सेना ने ऐसे समय पर घुसपैठ की है, जब स्थानीय निवासी तिब्बती धर्मगुरु दलाई लामा का जन्मदिन मना रहे हैं। जानकारी के मुताबिक डेमचोक की सरपंच ने चीन की सेना के घुसपैठ की पुष्टि की है। ये सैनिक सैन्य वाहनों में भर कर भारतीय सीमा में आए और चीन का झंडा फहराया।
डेमचोक की सरपंच उरगेन चोदोन ने बताया कि चीन के सैनिक भारतीय सीमा में आए। चीनी सैनिकों के डेमचोक में आने का मकसद कुछ और नजर आ रहा है।

सरपंच ने बताया कि चीन के सैनिक ऐसे समय पर इस इलाके में आए हैं जब स्थानीय लोग दलाई लामा का जन्मदिन मना रहे हैं। उरगेन ने बताया कि चीन के सैनिकों का डेमचोक में आना ङ्क्षचता की बात है। चीन इस तरह की गतिविधि को अंजाम देकर भारत पर दबाव बढ़ाना चाहता है, ताकि अगर कभी बातचीत हो तो उस समय इस क्षेत्र पर अपना दावा किया जा सके। चीन यह कह सकता है कि वहां चीन का झंडा है और उसका टैंट है, ऐसे में यह इलाका उसका है।