जानिए क्रिटिकल इलनेस इंश्योरेंस क्या होता है और इसके क्या फायदे हैं

नई दिल्लीः आजकल की बदलती जीवनशैली और प्रदूषण जैसे अन्य कारणों से लोगों में बीमारियों की रिस्क बढ़ी है. ऐसे में कोई भी व्यक्ति कभी भी बीमारी से ग्रसित हो सकता है. किडनी, हार्ट डिजीज, कैंसर जैसी गंभीर बीमारियां होने पर जिंदगी भर की जमा पूंजी खर्च हो सकती है. इससे बचने के लिये क्रिटिकल इलनेस इंश्योरेंस प्लान अच्छा विकल्प हैं. यह प्लान गंभीर, जानलेवा बीमारियों को कवर करता है और उनमें होने वाले खर्च से मुक्ति दिलाता है.

 

यह पॉलिसी रोग की पहले से निर्धारित स्थिति को कवर करती है. कैंसर, पैरालिसिस, दिल का दौरा पड़ना, ट्यूमर, किडनी फेल होने जैसी बीमारियों को कवर करती है. क्रिटिकल इलनेस पॉलिसी उन बीमारियों को परिभाषित करती है जो इसके तहत कवर होंगी.

इस पॉलिसी में बीमा की रकम प्राप्त करने के लिए किसी अस्पताल में भर्ती होने की आवश्यकता नहीं है. मेडिकल जांच में पॉलिसी में शामिल गंभीर रोग की पुष्टि होने पर एकमुश्त राशि का भुगतान बीमा कंपनी करती है. इसमें क्लेम का लेने के लिए किसी बिल या रसीदों को जमा करने की जरूरत भी नहीं होती है.

पॉलिसी में कई तरफ की बीमारी होती हैं कवर
इस पॉलिसी के तहत कैंसर, दिल का दौरा, किडनी, डायलिसिस, स्ट्रोक, मेन ऑर्गन ट्रांसप्लांट, ओपन चेस्ट सीएबीजी, हार्ट वॉल्व, कोमा, अंगों का स्थायी पैरालिसिस मोटर न्यूरॉन डिसीज, मल्टीपल स्केलेरोसिस, लास्ट स्टेज का लिवर रोग, लास्ट स्टेज का फेफड़े का रोग जैसी बीमारियां कवर की जा सकती हैं. बीमारियों को कवर करने की लिस्ट बीमा कंपनी पर भी निर्भर है. इसलिये एक ही पॉलिसी में सभी गंभीर बीमारियों को कवर करने के लिए पॉलिसी के नियम और शर्तों को सावधानी से पढ़ना जरूरी है.

 

क्रिटिकल इंश्योरेंस पॉलिसी को अन्य पॉलिसी पर क्रिटिकल इंश्योरेंस राइडर के साथ या फिर अलग से खरीद सकते हैं.क्रिटिकल इलनेस इंश्योरेंस पॉलिसी पर टैक्स बेनिफिट भी मिलता है. आयकर कानून 1961 के तहत तहत 25,000 रुपए तक और सीनियर सिटीजन 50,000 तक टैक्स छूट ले सकते हैं.