खेल जीवन का अभिन्न अंग: प्रो0 भारद्वाज

हरिद्वार-( कुल भूषण शर्मा) खेल जीवन का अभिन्न अंग है। खिलाडी जीवन मे निरन्तरता एवं खेल में श्रद्वापूर्वक भाग लेने से खेल मे ऊचाईयों को प्राप्त किया जा सकता है। ये विचार गुरूकुल कांगडी विश्वविद्यालय के शारीरिक शिक्षा एवं खेल विभाग के सभागार मे आयोजित राष्ट्रीय खेल दिवस के अवसर पर विचार-गोष्ठी में बतौर मुख्य अतिथि संकायाध्यक्ष प्रो0 ईश्वर भारद्वाज ने व्यक्त किये। उन्होने कहॉ कि हॉकी के जादूगर मेजर ध्यान चन्द जीवन की विषम परिस्थितियों मे संधर्ष से उपजे खिलाडी रहे है। इससे पूर्व कार्यक्रम का शुभारम्भ श्रद्वाजंलि सभा से प्रारम्भ हुआ जिसमें मेजर ध्यान चन्द को उनके 113 वें जन्म दिवस पर विभागीय शिक्षकों एवं छात्रों द्वारा श्रद्वाजंलि अर्पित की गई।

विभागाध्यक्ष प्रो0 आर0के0एस0 डागर ने मेजर ध्यान चन्द को अपनी श्रद्वांजलि अर्पित करते हुये कहॉ कि जकार्ता में चल रहे एशियाड में आज देश का प्रतिनिधित्व करने वाले अधिकांश खिलाडी मध्यम वर्गीय परिवारों से सम्बंधित है। हमारे देेश मे प्रतिभाओं की मी नही है। मध्यम वर्गीय परिवारों के युवाओं को खेलों मे अधिक अवसर प्रदान किये जाने चाहिये ताकि देश में खेलों कों सही अर्थो में बढावें मिल सके। एम0पी0एड0 तथा बी0पी0एड0 के छात्रों ने भी वर्तमान परिवेश मे खेलो की चुनौतियॉ एवं सम्भावनायें पर विचार प्रस्तुत किये।

इस अवसर पर प्रो0 आर0के0एस0 डागर, डॉ0 अजय मलिक, डॉ0 शिवकुमार चौहान, डॉ0 कपिल मिश्रा, डॉ0 अनुज कुमार, डॉ0 प्रणवीर सिंह, सुनील कुमार, दुष्यंत सिंह राणा, अश्वनी कुमार, संतोष कुमार रॉय, कुलभूषण शर्मा, धर्मेन्द्र बिष्ट, जोगेन्द्र, रजत आदि ने भी अपने विचार प्रस्तुत किये। कार्यक्रम के अन्त में छात्र वक्ताओं को उनके श्रेष्ठ प्रदर्शन पर पुरूस्कृत किया गया जिसमे प्रथम स्थान मोहन सिंह राणा तथा द्वितीय स्थान पर शुभम पोखरियॉल तथा साकेत वर्मा को संयुक्त रूप से प्रदान किया गया। कार्यक्रम का संचालन डॉ0 अजय मलिक एवं डॉ0 शिवकुमार चौहान ने किया। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान एवं शान्ति पाठ से हुआ।