केदारनाथ धाम के कपाट 29 अक्टूबर, तुंगनाथ के कपाट 6 नम्बर को होगे बंद

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रुद्रप्रयाग। भगवान केदारनाथ के कपाट 29 अक्टूबर को भैयादूज पर्व पर सुबह आठ बजकर तीस मिनट पर शीतकाल के लिए बंद कर दिये जायंेगे। कपाट बन्द होने के बाद भगवान केदारनाथ की पंच मुखी चल विग्रह उत्सव डोली हिमालय से रवाना होकर लिनचोली, जंगलचटटी, गौरीकुण्ड, सोनप्रयाग, सीतापुर यात्रा पड़ावों पर श्रद्धालुओं को आशीष देते हुए प्रथम रात्रि प्रवास के लिए रामपुर पहुंचेगी। तीस अक्टूबर को भगवान केदारनाथ की चल विग्रह उत्सव डोली रामपुर से रवाना होकर शेरसी, बडासू, मैखण्डा, नारायणकोटी, नाला यात्रा पड़ावों पर श्रद्धालुओं को आशीष देते हुए अंतिम रात्रि प्रवास के लिए विश्वनाथ मन्दिर गुप्तकाशी पहुंचेगी। 31 अक्टूबर को भगवान केदारनाथ की पंचमुखी चल विग्रह उत्सव डोली विश्वनाथ मंदिर गुप्तकाशी से रवाना होकर भैंसारी, विद्यापीठ, संसारी होते हुए दोपहर को अपने शीतकालीन गद्दीस्थल ओंकारेश्वर मन्दिर में विराजमान होगी और एक नवंबर से भगवान केदारनाथ की शीतकालीन पूजा ओंकारेश्वर मन्दिर में विधिवत शुरू होगी।

पंच केदारों में तृतीय केदार के नाम से विख्यात भगवान तुंगनाथ के कपाट बन्द होने की तिथि भी विजय दशमी पर्व पर शीतकालीन गद्दीस्थल मक्कूमठ में पंचांग गणना के अनुसार घोषित की गई। भगवान तंुगनाथ के कपाट छः नवम्बर 11 बजकर 30 मिनट पर धनु लग्न में शीतकाल के लिए बंद कर दिये जायेंगे। कपाट बंद होने के बाद भगवान तंुगनाथ की चल विग्रह उत्सव डोली अपने धाम से रवाना होकर सुरम्य मखमली बुग्यालों की वादियों से होकर प्रथम रात्रि प्रवास के लिए चोपता पहुंचेगी। सात नवम्बर को भगवान तंुगनाथ की चल विग्रह उत्सव डोली बनियाकुण्ड, दुगलबिटटा, मक्कूबैण्ड, हूण्डू व बनातोली यात्रा पड़ावों पर श्रद्धालुओं को आशीष देते हुए अंतिम रात्रि प्रवास के लिए भनकुण्ड पहुंचेगी। आठ नवम्बर को भगवान तंुगनाथ की चल विग्रह उत्सव डोली भनकुण्ड से रवाना होकर राकसी नदी में स्नान करने के बाद मक्कूमठ पहुंचने पर दो बजकर 45 मिनट पर अपने शीतकालीन गद्दी स्थल मक्कूमठ में विराजमान होगी तथा नौ नवम्बर से भगवान तंुगनाथ की शीतकालीन पूजा मक्कूमठ में शुरू होगी।

पंच केदारों में द्वितीय केदार के नाम से विख्यात भगवान मदमहेश्वर के कपाट 21 नवम्बर को 11 बजे वृषक लग्न में शीतकाल के लिए बन्द कर दिये जायंेगे। भगवान मदमहेश्वर के कपाट बन्द होने के बाद भगवान मदमहेश्वर की चल विग्रह उत्सव डोली अपने धाम से रवाना होकर कूनचटटी, मैखम्भा, नानौ, खटारा, बनातोली यात्रा पड़ावों पर श्रद्धालुओं को आशीष देते हुए प्रथम रात्रि प्रवास के लिए गौण्डार गांव पहुंचेगी। 22 नवम्बर को भगवान मदमहेश्वर की चल विग्रह उत्सव डोली गौंडार गांव से रवाना होकर द्वितीय रात्रि प्रवास के लिए राकेश्वरी मंदिर रांसी गांव पहुंचेगी। 23 नवम्बर को भगवान मदमहेश्वर की चल विग्रह उत्सव डोली राकेश्वरी मन्दिर रांसी से रवाना होकर उनियाणा, राऊलैंक, बुरूवा एवं मनसूना यात्रा पड़ावों पर श्रद्धालुओं को आशीष देते हुए अन्तिम रात्रि प्रवास के लिए गिरिया गांव पहुंचेगी। 24 नवम्बर को ब्रह्म बेला पर गिरिया गांव में श्रद्धालु भगवान मदमहेश्वर के निर्वाण रूप के दर्शन करेंगे और भगवान मदमहेश्वर की चल विग्रह उत्सव डोली विभिन्न यात्रा पड़ावो पर श्रद्धालुओं को आशीष देते हुए अपने शीतकालीन गद्दीस्थल ओंकारेश्वर मन्दिर ऊखीमठ में विराजमान होगी तथा ऊखीमठ में भव्य मदमहेश्वर मेले का आयोजन किया जायेगा। 25 नवम्बर से भगवान मदमहेश्वर की शीतकालीन पूजा ओंकारेश्वर मन्दिर ऊखीमठ में शुरू होगी।

इस मौके पर बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति के उपाध्यक्ष अशोक खत्री, कार्याधिकारी एनपी जमलोकी, मंदिर सुपरवाइजर पुजारी शिवशंकर लिंग, अभ्युदय जमलोकी, आचार्य हर्ष जमलोकी, वेदपाठी यशोधर मैठाणी, पंचगाई प्रतिनिधि शिवानंद पंवार, सत्य प्रसाद सेमवाल, वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी वचन सिंह रावत, वरिष्ठ सहायक प्रेम सिंह रावत, देवानंद गैरोला, विदेश शैव, नवीन शैव, देवी प्रसाद तिवारी, भगवती शैव, मनीष तिवारी, आदि मौजूद थे। वहीं तृतीय केदार तुंगनाथ के शीतकालीन गद्दीस्थल मक्कूमठ में आयोजित समारोह में मठापति रामप्रसाद मैठाणी, प्रबंधक प्रकाश पुरोहित, बलबीर नेगी आदि मौजूद रहे।