कोरोना संकट के बीच घरेलू खर्चों के लिए नहीं, इस बात को लेकर ज्‍यादा चिंतित हैं भारतीय

नई दिल्‍ली. देश में फैले कोरोना वायरस के प्रकोप (Corona Crisis) के बीच भारतीय घरेलू खर्चों को लेकर बहुत ज्‍यादा चिंतित नहीं है. एक सर्वे में पता चला है कि हर तीन में एक व्‍यक्ति यानी एक तिहाई लोग अगले 12 महीने के लिए अपने घरेलू खर्च (Domestic Expenses) आसानी से संभाल सकता है. दूसरे शब्‍दों में कहें तो इससे संकेत मिलता है कि लोगों ने अगले कुछ महीनों के लिए पर्याप्त बचत (Savings) कर रखी है. साथ ही वे तंगी से बचने के लिए सोच-समझकर खर्च करेंगे. यह ऑनलाइन सर्वे पॉलिसी बाजार डॉट कॉम (PolicyBazar.com) के 14,624 यूजर्स पर किया गया.

पहले से ज्‍यादा हुई हेल्‍थ और लाइफ इंश्‍योरेंस की अहमियत
सर्वे में कोविड-19 महामारी के दौरान लोगों की घरेलू आर्थिक स्थिति (Financial Condition), उनके निवेश (Investment) और इंश्योरेंस (Insurance) के बारे में समझने की कोशिश की गई. सर्वे में पता चला कि लोगों ने अपनी निजी आर्थिक स्थिति पर तो शानदार तरीके से नियंत्रण कर रखा है, लेकिन वे अपने परिवार के स्वास्थ्य पर मंडराने वाले संक्रमण के जोखिम (Health) को लेकर बहुत ज्‍यादा चिंता में हैं. ऐसे में उनके जीवन में हेल्थ और लाइफ इंश्योरेंस की अहमियत पहले से कहीं ज्‍यादा बढ़ गई है.

– मार्च से मई के बीच दोगुनी हुई है हेल्‍थ इंश्‍योरेंस की बिक्री
सर्वे में शामिल 51 फीसदी लोगों ने अपने परिवार के लिए इंश्योरेंस कवर खरीदने के बारे में सोचा, जबकि करीबन 80 फीसदी लोगों ने बताया कि उन्हें वैश्विक महामारी (Pandemic) के दौरान इंश्योरेंस होने की अहमियत अब समझ आ गई है. आज के दौर में इंश्योरेंस एक ऐसा प्रोडक्ट बन चुका है, जिसे खरीदने के लिए कंपनी के सेल्स एजेंट्स को लोगों को ज्‍यादा मनाना नहीं पड़ रहा है. वर्ष 2019 के मुकाबले इस साल मार्च से मई के बीच हेल्थ इंश्योरेंस (Health Insurance) की दोगुनी खरीदारी हुई है.

सिर्फ 19 फीसदी लोगों को सता रहा है नौकरी जाने का डर
सर्वे में शामिल सिर्फ 15 फीसदी लोग इस चिंता में नजर आए कि कहीं उनके पास पैसों की तंगी (Financial Crisis) ना हो जाए. वहीं, सिर्फ 19 फीसदी लोगों को अपनी नौकरी बची रहने की चिंता सता रही थी. उन्‍हें डर था कि कहीं उनकी नौकरी ना चली (Job Loss) जाए. अगर ऐसा हुआ तो वे आर्थिक संकट में फंस जाएंगे. सर्वे के नतीजों पर पॉलिसी बाजार डॉट कॉम के सीईओ सरबवीर सिंह ने कहा कि ऐसे मुश्किल दौर में अपनी आर्थिक स्थिति, निवेश और खर्चों को लेकर लोगों की राय जानना काफी जरूरी होता है.

‘इंश्‍योरेंस को लेकर भारतीयों में तेजी से बढ़ी है जागरूकता’
कोविड-19 के दौर में टर्म लाइफ इंश्योरेंस (Term Life Insurance) और हेल्थ इंश्योरेंस लोगों की फाइनेंशियल प्लानिंग का अहम हिस्सा बन चुके हैं. जो पहले इनमें निवेश करना पैसे की बर्बादी मानते थे, वे लोग भी खुद आगे आकर इन प्रोडक्‍ट्स की खरीदारी कर रहे हैं. सर्वे के मुताबिक, वैश्विक महामारी ने भारत में इंश्योरेंस के प्रति लोगों में तेजी से जागरूकता बढ़ाई है. हालांकि, ये ताज्‍जुव की बात है कि इसके बाद भी देश में इंश्योरेंस कवर रखने वाले लोगों की संख्या अब भी काफी कम है.

भारतीयों में बढ़ी है निवेश को लेकर जानकारी और समझ
कोरोना संकट के कारण बने अनिश्चितता के माहौल में लंबी अवधि की बचत और निवेश के बारे में लोगों की सोच को समझने के लिए पूछा गया कि निवेश विकल्पों को लेकर उनकी क्या राय है? इस पर 47 फीसदी लोगों का कहना था कि उन्हें यह समय निवेश और अच्छे रिटर्न (Returns) के लिए सही लगता है. इसका मतलब है कि भारतीयों में निवेश को लेकर जानकारी बढ़ी है, क्योंकि आमतौर पर किसी गंभीर स्वास्थ्य संकट या महामारी के बीच अगर शेयर बाजार (Share Markets) गिरते हैं तो बाद में तेजी से उछलते भी हैं. (साभार News18 )