बोफोर्स के बाद भारतीय सेना को लगभग 30 साल बाद मिलेंगे नई तोपें

56

नई दिल्लीः भारतीय सेना को लगभग 30 साल बाद अगले हफ्ते नई तोपें मिलेंगी. नासिक के पास देवलाली के स्कूल ऑफ आर्टिलरी में रक्षामंत्री निर्मला सीतारमण दो आर्टिलरी सिस्टम सेना में शामिल करेंगी. ये दोनों तोपें पहाड़ों में लड़ाई के लिए बेहद कारग़र हैं. सेना में शामिल होने वाली इन दोनों तोपों के नाम हैं अल्ट्रालाइट होवित्जर M-777 और सेल्फ प्रोपल्ड गन K-9 वज्र. कुल 145 ULTRA LIGHT HOWITZER M-777 का सौदा किया गया है जिनमें से 25 को तैयार हालत में भारत लाया जाएगा. शेष 120 तोपों को महिन्द्रा डिफेंस के सहयोग से भारत में ही बनाया जाएगा

इन तोपों की सप्लाई मार्च 2019 से नियमित तौर पर शुरू होगी.हर महीने 5 तोपों के हिसाब से 2021 तक सभी तोपें सेना को मिल जाएंगी. इन तोपों की रेंज 30 किलोमीटर तक है और हल्की होने की वजह से इनकी पहाड़ों में तैनाती आसान होगी. इन्हें हेलीकॉप्टर के ज़रिए भी ले जाया जा सकता है. संभावना है कि इनका ज्यादा इस्तेमाल भारत की पहली माउंटेन स्ट्राइक कोर में होगी जिसे हिमालय की ऊंचाई में चीन के ख़तरे से निबटने के लिए बनाया जा रहा है.

दक्षिण कोरिया के सहयोग से बनाई जा रही K-9 वज्र एक SELF PROPELLED GUN है. ये ठीक उसी तरह है जैसे कि एक बख्तरबंद टैंक पर एक लंबी दूरी तक मार करने वाली तोप लगा दी जाए. इसमें 5 सैनिकों का क्रू होता है और ये कैसी भी ज़मीन पर 67 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चल सकती है. इसका बख्तर तोपचियों को गोलाबारी से सुरक्षित रखता है. इसकी तोप अलग-अलग तक के गोलों से 30 से 40 किमी दूर दुश्मन को तबाह कर सकती है. भारतीय सेना को ऐसी 100 तोपें मिलेंगी.

80 के दशक में भारतीय सेना में बोफोर्स तोपें शामिल हुई थीं. लेकिन उस सौदे में दलाली के आरोपों के बाद तीन दशक से ज्यादा समय में सेना के लिए कोई तोप नहीं खरीदी गई. भारतीय सेना के ज़खीरे में बड़ी तादाद 105 MM की फील्ड गन है जिनकी मार 17 किमी तक है. भारतीय सेना को अपने दोनों पड़ोसियों चीन और पाकिस्तान के साथ ज्यादातर हिमालय की ऊंची पहाड़ियों पर मोर्चा लेना पड़ता है. पहाड़ों की लड़ाई में केवल तोपें ही जंग का फैसला करती हैं.

कारगिल की लड़ाई में ये अनुभव हो चुका है. भारतीय सेना लंबे अरसे से तोपखाने की कमी की शिकायत करती रही है. इन दो नई तोपों का सेना में शामिल होना शुरू होने से इस कमी को काफी हदतक दूर किया जा सकेगा.