श्री नंदा देवी महिला लोक विकास समिति द्वारा चमोली जिले में Hygienic Sanitary Napkin Dispenser की सफल शुरुवात

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(डॉo किरन जयदीप पुरोहित) 2015 में 13 वित्त आयोग के तहत नवाचार योजना के अन्तर्गत जनपद चमोली मे Senetry Hygenic Proposal जिलाधिकारी श्री मुरुगेशन जी के दिशा निर्देशानुसार शुभारंभ किया गया जिसका मुख्य उद्देश्य जनपद चमोली में सेनेटरी नैपकिन का निर्माण एवं विपणन करना था !

वर्तमान में चमोली की जिलाधिकारी स्वाति भदौरिया के सहयोग से हमारी संस्था 14 स्कूल और कॉलेजों में Sanitary Napkin Dispenser लगा रही है ! जिलाधिकारी स्वाति भदौरिया ब्यक्तिगत तौर पर भी इस प्रोजेक्ट की सफलता को लेकर काफी आशान्वित हैं ! इसके अलावा अर्थसांख्यिकी अधिकारी (DSTO) श्री जंगपांगी का भी पूरा सहयोग हमारी संस्था को मिल रहा है !

सुदूर जनपद चमोली जैसे सीमांत इलाके में सेनेटरी नैपकिन का निर्माण करना अपने आप में एक अनोखा प्रयास था ! इसके लिए श्री नंदा देवी महिला लोक विकास समिति द्वारा दक्षिण भारत में जाकर के विभिन्न यूनिटों का भ्रमण किया गया जिसके तहत जनपद चमोली में अच्छे से और उचित दर पर यूनिट स्थापित हो सके ! हमारी टीम ने दक्षिण भारत में काफी वार्तालाप किया और निर्माण प्रक्रिया प्रशिक्षण प्राप्त किया ! तदुपरांत मध्य प्रदेश स्तिथ कंपनी द्वारा उत्तम क्वालिटी की मशीन को जनपद चमोली में स्थापित करवाया गया !

चूँकि उत्तराखंड के सीमांत जनपद में इस कार्य को किये जाने का ये प्रथम प्रयास था इसलिए सैनिटरी नैपकिन निर्माण की मशीनें एवं कच्चा माल मध्य और दक्षिण भारत से ही प्राप्त किया जा सकता था ! हमारी टीम ने अच्छे से अच्छा उत्तम क्वालिटी के माल का प्रशिक्षण लेकर सैनिटरी नैपकिन निर्माण के कार्य का शुभारंभ किया !

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श्री नंदा देवी मेला लोक विकास समिति द्वारा निर्मित सेनेटरी पैड आज के दौर में प्रचलित बहुराष्ट्रीय कम्पनियूं द्वारा निर्मित सेनेटरी पैड से किसी भी मामले में निम्न क़्वालिटी के नहीं हैं ! हमने गुणवत्ता कोई समझौता नहीं किया गया है ! इसीलिए बालिका गर्ल्स कॉलेज में शुभारंभ किया गया ! इस प्रशिक्षण के दौरान विभिन्न महिला समूह की महिलाओं को प्रशिक्षण दिया गया की किस तरीके से सेनेटरी नैपकिन बनाई जाती हैं ! उनको प्रत्येक तकनीकी जानकारी से अवगत कराया गया ! क्या क्या रॉ मैटेरियल सैनिटरी नैपकिन के निर्माण में लगता है और मशीन किस तरीके से काम करती है ! सेनेटरी पैड निर्माण में लगी मशीन कंप्रेसर से चलती है ! ये कार्य 260 एमएम की मशीन द्वारा किया जाता है !

पूरे दिन में एक मशीन की मदद से महिलाओं द्वार 500 पैड बनाए जा सकते हैं !

कुछ महिलाओं के पीरियड में तेज दर्द होता है तेज दर्द की वजह से महिलाओं को स्वास्थ्य संबंधी प्रॉब्लम होती है ! दूसरी तरफ तो कुछ महिलाओं के लिए ये एक सामान्य दौर होता है ! पर दोनों स्तिथियूं में नैपकिन को लेकर लापरवाही बहुत खतरनाक है ! इसलिए हर दिन सेनेटरी पैड को बदलना जरुरी होता है ! इस वजह से इसका मूल्य कम से कम होना चाहिए तांकि हर महिला उचित दर पे इन्हे प्राप्त कर सकें और सफाई के साथ इन्हें उपयोग में ला सकें !

भारत जैसे देश में महिला स्वास्थ्य सुरक्षा एक बहुत बड़ा मुद्दा है ! देश में जाने कितनी लड़कियां सुविधा न मिलने के कारण स्कूल छोड़ देती हैं तो वहीं महिलाओं का एक बड़ा तबका सेनेटरी पैड जैसी चीज से अनजान है ! यूरिन इन्फेक्शन से सुरक्षा की आवश्यकता होती है क्योंकि उन्हें इसके बारे में उचित जानकारी नहीं मिल पाती है ! गाँवों में लड़कियां मासिक धर्म के दौरान गंदे कपड़े या पुराने समाचार पत्र का उपयोग करती हैं !

एक शोध के अनुसार ग्रामीण इलाकों में 23 % लड़कियां मासिक धर्म शुरू होने पर स्कूल छोड़ देती है !


महिलाओं की स्वच्छता से जुड़े उत्पाद का बाजार काफी बड़ा है ! उनमें सेनेटरी पैड की माँग सर्वाधिक होती है ! इसको स्वरोजगार से जोड़कर हम महिला समूहों के लिये रोजगार के अवसर पैदा कर सकते हैं ! इसलिए आसपास के क्षेत्र में महिलाओं को निर्माण प्रक्रिया के तहत प्रशिक्षण देने की आवश्यकता है !

यह प्राकृतिक प्रक्रिया है और अपने साथ बहुत सारी समस्याओं को लेकर आती है ! मासिक धर्म के दौरान अगर सही रखरखाव और सफाई का ध्यान रखा जाये तो कई तरह के गंभीर समस्याओं का निदान वक़्त रहते किया जा सकता है ! ग्रामीण इलाकों में पानी, सफाई और शौचालय की सही उपलभ्ता न होने की वजह से कई गम्भीर बीमारी हो जाती हैं ! इस समस्या को निपटने के लिए हमारी संस्था महिलाओं को महिलाओं के लिए अवसर उपलब्ध करा रही हैं !
हमारी संस्था से जुड़ी कुछ महिलाओं ने बताया कि गांव में कुछ महिलाओं को मासिक धर्म की वजह से गंभीर बीमारियां हुयी !

कुछ बीमारियां तो इतनी गंभीर थी कि ऑपरेशन के जरिए बच्चेदानी तक निकालनी पड़ी !

हमें जब इस तरह के अनुभवों के बारे में पता चला तो हमने महिलाओं की इस तकलीफ के निदान के लिये कुछ करने की जरुरत महसूस की ! हमारा यह अभियान पिछले साल शुरू हुआ इसमें कुल 15 महिला स्वयं सहायता समूह की महिलाओं ने भाग लिया ! महिलाओं के स्वच्छता से जुड़े उत्पादों को बाजार में बेचा जाता है ! इससे महिलाओं को स्वरोजगार के अवसर मिले और वो अपने पैरों पर खड़े होक सम्मान के साथ जिंदगी जे रही हैं ! आसपास के क्षेत्रों में इच्छुक महिलाओं को निर्माण प्रक्रिया में अवगत कराया गया !

उत्तराखंड में जनपद चमोली में हमने इस काम को एक मिशन के रूप में लिया और हमने लक्ष निर्धारित किया है की जनपद चमोली में कोई भी महिला या लड़की सेनेटरी पैड की उपलब्धता से वंचित न रह सके !

इसे सफल बनाने के लिए ग्रामीण क्षेत्रों में अधिक से अधिक लोगों को जागरूक किया जाएगा ! पैड का उपयोग नहीं करने से महिलाओं को गंभीर बीमारियां हो रही हैं ! इस अभियान के माध्यम से हम ज्यादा से ज्यादा जागरूकता फैलायेंगे !
सेनेटरी पैड की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिये हम जगह जगह सेनेटरी पैड डिस्पेंसर लगाये हैं ! प्राम्भरिक स्तर पर बालिका विध्यालयूं और बालिका कॉलेजों में इन्हे लगाया गया है ! डिस्पेंसर मशीन के अंदर ₹5 का सिक्का डालने पर दो नैपकिन पैड मिलते हैं ! डिस्पेंसर एक एटीएम मशीन की तरह होता है ! डिस्पेंसर के माध्यम से बहुत कम कीमत पर बालिकाओं को बिना रोक टोक के सेनेटरी नैपकिन पैड उपलब्ध कराए जा रहे हैं !

हमारे अभियान के दौरान बहुत से पुरुषों को भी सेनेटरी पैड की उपयोगिता समझ आयी और उन्होंने महिलाओं के लिए इसकी उपयोगिता को सराहा !

पुरुषों की सराहना और समर्थन की वजह से सामाजिक स्तर पर एक बड़े गतिरोध से भी निजात मिल रही है !

वर्तमान में संस्था द्वारा प्रतिदिन हजार सेनेटरी पैड का निर्माण होता है ! चार महिलाएं निर्माण का कार्य करती है और 4 महिलाएं बाजार व्यवस्था को संभालती हैं ! निर्माण और विपणन के द्वारा संगति एसोसिएशन फेडरेशन का गठन किया गया ! महिलाओं को महिलाओं से जोड़ा गया ! मार्केट लिंक के द्वारा महिलाओं को विभिन्न कार्यक्रमों से जोड़कर उनको आत्मनिर्भरता की ओर अग्रसर किया गया ! महिलाएं नाबार्ड द्वारा निर्मित 707 समूहों में उत्पाद बेचती हैं !

उत्पादों को रिटेलर दुकानों के पास रखा गया है जहां पर महिलाएं उत्पादों को इस कार्यक्रम से जुड़कर प्रतिमाह ₹4000 से ₹5000 की कमाई करके अपने स्वरोजगार की ओर आगे बढ़ रही हैं ! आने वाले समय में इस उत्पाद को ब्रांडिंग के साथ बाजार में उतारा जायेगा ! इस से उध्यम बढ़ेगा और रोज़गार के और अवसर उपलब्ध रहींगे !

इस प्रोजेक्ट के दौरान हमने पाया की अब महिलाएं खुलकर सामने आ रही हैं और अपने स्वास्थ्य के प्रति महिलाएं जागरुक हुयी हैं !