Hariyali Teej 2019: हरियाली तीज को बना देंगे कब और कैसे करें पूजन, ये स्वादिष्ट पकवान

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श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि यानी 03 अगस्त दिन शनिवार को हरियाली तीज या श्रावणी तीज मनाई जाएगी। इस दिन महिलाएं समूह में एकत्र होकर गीत गाती हैं, झूला झूलती हैं, मेहदी लगती हैं, वहीं माता-पिता अपनी बेटियों के घर स्वादिष्ट पकवान गुजिया, घेवर, फेनी और श्रृंगार के सामान भेजते हैं। महिलाएं इस दिन 16 श्रृंगार करती हैं, सुहाग के प्रतीकों को धारण करती हैं। शाम को माता पार्वती और भगवान शिव की पूजा करती हैं।

किसी भी फेस्टिवल को खास बनाने के लिए पकवानों का बहुत महत्व होता है. इसी तरह हरियाली तीज पर भी ऐसे पकवान बनाए जाते हैं, जो बेहद लजीज होते हैं. अगर आप भी हरियाली तीज पर कुछ लजीज रेसिपी ट्राई करना चाहते हैं, तो एक बार इन ऑप्शन्स पर नजर डाल सकते हैं-

घेवर

सामग्री

डेढ़ कटोरी मैदा, 2 कप पानी, डेढ़ बड़ा चम्मच जमा गाढ़ा घी, डेढ़ कप बर्फ का ठंडा पानी, घी, सवा 2 कटोरी शकर, गुलाब पत्ती, चुटकी भर पीला रंग, कटे हुए पिस्ता व बादाम, 1 मटका रखने वाली रिंग।

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विधि 

सबसे पहले जमा हुआ गाढ़ा घी लेकर एक बर्तन में बर्फ के ठंडे पानी के साथ खूब फेंटें। करीबन 5-10 मिनट बाद घी में से पानी बाहर निकल जाता है। अब पानी निथारकर इसमें थोड़ा-थोड़ा कर मैदा मिलाकर फेंटे।

जब भजिए से भी पतला घोल तैयार हो जाए, तब छोटी कड़ाही में मटका रखने वाली रिंग रखें। इसमें घी डालकर गर्म करें। जब घी अच्छी तरह गर्म हो जाए, तब रिंग के बीच में धीरे-धीरे धार-सी बनाते हुए मैदे का घोल छोड़ें। रिंग करीब आधा डूबा होना चाहिए।

हल्का बादामी होने लगे, तब सलाई की सहायता से घेवर उठा लीजिए। घेवर पर 3-4 बार डेढ़ तार की गर्म चाशनी डालें और तैयार घेवर को मेवे से सजाकर पारंपरिक व्यंजन पेश करें।

केसरिया भात

सामग्री

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1 कटोरी बासमती चावल, डेढ़ कटोरी शकर, इलायची पावडर आधा चम्मच, 5-7 केसर के लच्छे, मीठा पीला रंग चुटकी भर या आधा चम्मच हल्दी, 15-20 किशमिश (गुनगुने पानी में भीगे हुए), 1 चम्मच घी, 2-3 लौंग, मेवे की कतरन (पाव कटोरी)।

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विधि

चावल बनाने के पूर्व 1 घंटे तक गलाकर रखें। अब एक बड़े मर्तबान में पानी उबाल लें। उसमें हल्दी डालें और चावल पकाकर थाली में ठंडा होने के लिए रख दें। दूसरी ओर एक से डेढ़ तार की चाशनी तैयार कर लें, उसमें पके चावल डालकर कुछ देर चलाएं।

अब इलायची एवं मीठा रंग मिलाएं। एक पैन में अलग से घी गर्म करके उसमें लौंग डालें और ऊपर से चावल पर बुरकाएं, साथ ही मेवे की कतरन और भीगे हुए किशमिश भी डालें और मिलाकर ठंडा या गर्म जैसे चाहे लजीज शाही केसरिया भात पेश करें।

रवे के लड्डू

सामग्री

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500 ग्राम सूजी (रवा), 500 ग्राम घी, 400 ग्राम शक्कर का बूरा, 20-25 किशमिश, इलायची पावडर एवं गुनगुना पानी।

विधि 

सबसे पहले सूजी को छानकर उसमें 2-3 बड़े चम्मच गरम घी का मोयन डालकर अच्छी तरह मिला लें। अब सूजी को गुनगुने पानी से कड़ा गूंध लें। एक कड़ाही में घी गरम रखें और आटे के बड़े-बड़े मुठिए बनाकर धीमी आंच पर तल लें।

अब तले मुठिए को हाथ से बारीक मसलकर उसका रवा तैयार करके बारीक चलनी से छान लें। जब सारे मुठिए का जब रवा तैयार हो जाए तब उसे थोड़ी देर ठंडा होने के लिए रख दें। अब उसमें शक्कर का बूरा, इलायची पावडर डालकर मिश्रण को एकसार कर लें।

अब अगर जरूरत हो तो और घी मिलाती जाएं, ताकि लड्डूस आसानी से बन सकें। लड्डूर बनाने के बाद ऊपर से एक-एक किशमिश चिपका दें। लीजिए तैयार है रवे के लाजवाब लड्डूब।

जायकेदार दाल-बाटी

सामग्री

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1 किलो गेहूं का दरदरा आटा, 1 किलो शुद्ध देशी घी, 1 चम्मच जीरा, 1 चम्मच अजवाइन, 1 चम्मच सौंप, आधी कटोरी दही, नमक आवश्यकतानुसार।

विधि

आटे में जीरा, अजवाइन, सौंप, दही, नमक व दो बड़े चम्मच घी खूब अच्छी तरह मिक्स कर लें और गुनगुने पानी से कड़ा गूंथ लें।

लड्डू के आकार की तरह गोल-गोल बना लें। सेंकने के लिए रख दें। सिंकने पर बाटी को हल्के हाथ से फोड़कर पिघलते घी में डालती जाएं। बाटी तैयार है। इसे गरमा-गरम दाल और हरी चटनी के साथ खाएं और खिलाएं।

 हरियाली तीज के दिन महिलाओं को कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए —

1. हरियाली तीज पर महिलाओं को भूलकर भी ये तीन बातें नहीं करनी चाहिए- पति से छल-कपट, झूठ बोलाना एवं दुर्व्यवहार। ऐसा करने से व्रत पूर्ण नहीं माना जाता है।

2. इस यदि बेटी मायके में हैं तो उसे हरे रंग की चूड़ियां, हरे रंग की साड़ी और हरे रंग की नेल पॉलिश देना शुभ माना जाता है।

3. हरियाली तीज पर महिलाएं हरे रंग को ज्यादा प्राथमिकता देती हैं, इस दिन हरी चूड़ियां पहनती हैं, जो उनके पति की लंबी आयु, खुशहाली और तरक्की का प्रतीक होती हैं।

4. हरियाली तीज का व्रत निर्जला होता है, इस दिन व्रत रहने वाली महिलाओं को जल ग्रहण नहीं करना चाहिए। हालांकि जो बीमार हैं या गर्भवती हैं, उनको छूट है।

5. ऐसी मान्यता है कि जब हम अपने पति के मंगलकामना के लिए व्रत रहते हैं, तो किसी अन्य के विषय मे बुरा न सोचें।

6. इस व्रत के समय निद्रा का त्याग करना चाहिए। रात के समय भजन-कीर्तन करने का विधान है।

7. व्रत रखने वाले व्यक्ति को किसी का तिरस्कार नहीं करना चाहिए और न ही किसी रूप में प्रकृति को नुकसान पहुंचाना चाहिए।