जादूगर – सम्राट नरेंद्र मोदी

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(नवल खाली)
मोदी जी की छवि यूँ तो देश विदेशों तक प्रसिद्ध है । उनके उठने,बैठने, बोलने व अनेकों जानकारियों से लोग प्रभावित होते हैं । दूसरे मैनेजमेंट वाली स्टाइल में कहूँ तो – मोदी जी एक अच्छे मार्केटिंग गुरु हैं । यदि यही बात और ठेठ पहाड़ी में कहूँ तो …. मोदीजी की “गिच्चि बड़ी चिफली है”(वाक्पटुता के धनी), जिसमे आम आदमी तुरन्त फिसल जाता है ।।

मोदी जी के व्यक्तित्व के लाखों लोग कायल हैं । एक गजब का आकृष्ट लिए ये बुजुर्ग व्यक्ति, आज अपने मैनेजमेंट के गुर की वजह से भाजपा का सारथी बना है ।

वरना मुद्दों के नाम पर वर्तमान भाजपा सरकार के पास ऐसा कुछ खास नही है । क्योंकि देश का इस समय सबसे बड़ा मुद्दा बेरोजगारी है । जिसकी वजह से पढ़े लिखे लाखों नौजवान खाली हाथ बैठे हैं । अब ये न कहिएगा कि पकौड़े तल दो !!! एक नौजवान जो पढ़ लिख कर, डिग्री, डिप्लोमा लेकर, लाखो रुपये आपके प्राइवेट इंस्टीट्यूटो को देकर आज भर्ती परीक्षाओं का इंतजार कर रहे हैं । बेचारे भरी जवानी में अपनी एनर्जी यूँ ही वेस्ट कर रहे हैं ।

देखा जाय तो वर्तमान और पिछली सरकारें, रोजगार देने में सफल नही रही हैं। इसमें कॉंग्रेस सरकार भी उतनी ही जिम्मेदार है जितनी कि भाजपा ।

इसके पीछे सबसे बड़ा कारण सरकारी संस्थाओं का निजीकरण है । आज शिक्षा व स्वास्थ्य के क्षेत्र में निजीकरण अपनी पूर्णता की ओर अग्रसर है । जिससे सरकारी नौकरियों में निरंतर कमी होती जा रही है ।

आज देश मे 35% वोट सिर्फ युवाओ का है, जो विनिंग वोट कहलाता है, इसमें से अधिकांश युवा वोटर किसी भी जाति, धर्म, आरक्षण को नही मानता वो मुद्दों पर वोट करता है ।

मोदी जी का पिछला चुनाव भी युवाओं ने ही जिताया था । इसलिए युवाओ के लिए कुछ भी खास करने में मोदी जी सफल नही हुए हैं । पर साथ ही मोदी जी देश मे नये प्रयोग करने वाले जादूगर हैं । जादूगर जो भी दिखाता है वो दिखता तो सच है पर होता नही ।।।

मतलब अब तो आप समझ ही गए होंगे । नोटबन्दी व सवर्णों को 10% आरक्षण भी उसी जादू का हिस्सा है । मतलब यदि इस विशाल भारत के लोगों का फोकस अपनी तरफ करना है तो नोटबन्दी व आरक्षण जैसे खेल दिखाकर जनता को नजरबंद करना जरुरी है ।

दिल्ली में रोजगार की इस मौलिक नीति के लिए प्रवीण सिंह व उनके साथी लगातार डटे हैं ।

दूसरा पक्ष ये भी है कि राहुल अपनी पप्पू वाली छवि से अभी उभरने की कोशिश कर रहे हैं । अब वो मोदी की चाल चलकर चिल्लाने वाली छवि बनाने में लगे हैं । अब मोदी इस छोर से चोर चोर चिल्ला रहे हैं ….. तो राहुल दूसरे छोर से चोर चोर चिल्ला रहे हैं । और जब दो तरफ से चोर चोर शब्द हो तो क्या कहलाता है??? ये तो आपको पता ही होगा ।

मोदी जी के पास जनता के सामने पुनः जाने के लिए अपनी साफ छवि, विदेशों में अपनी दमदार उपस्थिति व अपने प्रभावशाली भाषणों के अतिरिक्त मुद्दे जैसी कोई महत्वपूर्ण चीज तो नही है पर एक ग्रेट जादूगर सम्राट का जादू जरूर है । ये ही मोदी जी की सबसे बड़ी काबिलियत है ।

काँग्रेस का संगठन व मैनेजमेंट अभी बिखरा हुआ है । राहुल के ऊपर लोड ज्यादा होने से राहुल अभी धीमे लग रहे हैं । चिल्लाने वाली थ्योरी अपनाने से खुद की छवि दमदार बनाने की कोशिशें भी लगातार कर रहे हैं । पर मुद्दों को पाँच साल भुनाने में असफल रहे हैं । अब चुनाव नजदीक आते ही बेरोजगार बेरोजगार जरूर चिल्ला रहे हैं । पर उनके पास इससे निपटने के क्या प्लान हैं ये भी स्पष्ट नही है ।

अब देखना ये होगा कि भारत मे रोजगार की मौलिक अधिकार नीति को लागू करने की उम्मीद में युवा इस बार किसको चुनते हैं ?