गायत्री जयंती 2020 : गायत्री जयंती और क्या है गायत्री माता की महिमा, जानें मंत्र के लाभ

गायत्री जयंती ज्येष्ठ माह में शुक्ल की एकादशी तिथि के दिन मनायी जाती है। इस साल यह तिथि 2 जून को पड़ रही है। हालांकि गायत्री जयंती को लेकर मतभेद भी है। कहीं पर गायत्री जयंती ज्येष्ठ महीने में शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को तो कहीं एकादशी के दिन मनायी जाती है वहीं कहीं पर यह श्रावण मास की पूर्णिमा के दिन भी मनाई जाती है।

मां गायत्री के बारे में आपने जरूर सुना होगा, पर क्या कभी आपके मन में यह सवाल नहीं आया कि आखीर यह गायत्री मां है कौन और इनकी जयंती क्यों मनायी जाती है???

अगर अब तक आपको इन सवालों का जवाब नहीं मिल पाया है, तो घबराए नहीं क्योंकि वेद संसार आज आपको मां गायत्री और उनकी जन्म कथा के बारे में विस्तार से बताने जा रहा है.

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि ज्येष्ठ माह में शुक्ल की एकादशी तिथि के दिन ही गायत्री जयंती मनायी जाती है। इस साल यानी कि 2020 में गायत्री जयंती 2 जून को मनाया जाएगा । हालांकि, कई जगह गायत्री जयंती को लेकर मतभेद भी देखने को मिलता है। जैसे कि कहीं पर गायत्री जयंती ज्येष्ठ महीने में शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को तो कहीं यह जयंती एकादशी के दिन मनायी जाती है और वहीं कहीं पर यह श्रावण मास की पूर्णिमा के दिन भी लोगों द्वारा मनाई जाती है।

गायत्री जयंती के दिन क्या होता है –

गायत्री जयंती का पर्व मां गायत्री देवी के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है। वहीं, हमारे धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन मां गायत्री का अवतरण हुआ था। शास्त्रों में तो मां गायत्री को वेद माता के नाम से भी जाना जाता है। कहा तो यह भी जाता है कि वेदों की उत्पत्ति मां गायत्री से ही हुई है। और तो और गायंत्री मंत्र में ही चारों वेदों का सार भी माना गया है। और इसलिए धार्मिक मान्यता के अनुसार अकेले गायत्री मंत्र में ही चारों वेदों का ज्ञान भी माना गया है। ध्यान रहें कि गायत्री जयंती के दिन मां गायत्री का जाप ज़रूर करें।गायत्री माँ मंत्र - gayatri maa mantra

दूसरी ओर, शास्त्रों में इस बात का उल्लेख है कि – सृष्टि के आरंभ में ब्रह्मा जी के मुख से ही गायत्री मंत्र प्रकट हुआ था। कहते हैं कि मां गायत्री की कृपा से ब्रह्माजी ने गायत्री मंत्र की व्याख्या अपने चारों मुखों से चार वेदों के रूप में की थी। गौरतलब है कि आरम्भ में मां गायत्री की महिमा सिर्फ देवताओं तक ही थी, पर वह महर्षि विश्वामित्र ही थे जिन्होंने अपनी कठोर तपस्या से मां की महिमा अर्थात् गायत्री मंत्र को जन-जन तक पहुंचाया था।

यही नहीं, एक प्रसंग में तो यह भी मौजूद है कि – एक बार ब्रह्माजी ने यज्ञ का आयोजन किया। परंपरा के अनुसार यज्ञ में ब्रह्माजी को पत्नी सहित ही यज्ञ वैठना था, लेकिन किसी कारणवश ब्रह्मा जी की पत्नी सावित्री को आने में काफी देर हो गई और यज्ञ का शुभ मुहूर्त निकला जा रहा था तो ऐसे में ब्रह्मा जी ने वहां मौजूद देवी गायत्री से विवाह कर लिया और उन्हें अपनी पत्नी का स्थान देकर यज्ञ प्रारम्भ कर दिया था।

गायत्री मंत्र क्या है –

ॐ भूर् भुवः स्वःतत् सवितुर्वरेण्यंभर्गो देवस्य धीमहिधियो यो नः प्रचोदयात्।।

गायत्री मंत्र के क्या हैं लाभ –

ध्यान रहे कि जो भी भक्त सच्चे मन से गायत्री मंत्र का नियमित रूप से जाप करता है तो उसके अंदर आध्यात्मिक शक्ति जागृत होती हैं। ऐसी मान्यता है कि इस खास मंत्र के जाप से व्यक्ति को धन लाभ के साथ-साथ सामाजिक प्रतिष्ठा की प्राप्ति होती है और वह एक खुशहाल जीवन का आनंद उठाता है।

गायत्री मंत्र जाप से क्या-क्या आशीर्वाद प्राप्त हो सकता है. यहां जानें –

• छात्र व छात्राओं के लिए यह मंत्र सबसे ज्यादा लाभदायी माना जाता है। जो भी छात्र या छात्राएं इस खास मंत्र की जाप करेंगे उनके ज्ञान में वृद्धि अवश्य होगी।

• वहीं, जिन लोगों को शत्रु से भय हमेशा रहता है. उन्हें यह मंत्र डर व भय से मुक्त करता है।

ॐ भूर् भुवः स्वः
तत् सवितुर्वरेण्यं
भर्गो देवस्य धीमहि
धियो यो नः प्रचोदयात्।।