नौकरी के नाम पर लाखों की धोखाधड़ी, दो गिरफ्तार

रुद्रप्रयाग/देहरादून, सरकारी विभागों मे नौकरी दिलाने का लालच देकर बेरोजगगारों ठगने के कई मामले आये दिन प्रकाश में आते रहते है। इसी प्रकार की ठगी का एक प्रकरण साईबर क्राईम पुलिस स्टेशन के संज्ञान में आया, जिसमें अपराधियों द्वारा सोशल मीडिया के माध्यम से वन विभाग उत्तराखण्ड में विभिन्न पदों पर नियुक्ति दिलाये जाने का प्रलोभन देकर कई बेरोजगारों से मोटी रकम लेकर ठगी की गयी | जिस पर वन विभाग उत्तराखण्ड द्वारा दिनांक 06 फरवरी -2020 को थाना साईबर क्राईम पुलिस स्टेशन में अभियोग पंजीकृत कराया और उच्चाधिकारियों के आदेशानुसार विवेचना हेतु निरीक्षक श्री पंकज पोखरियाल को नियुक्त किया गया । पुलिस उप महानिरीक्षक रिधिम अग्रवाल, एसटीएफ के निर्देशन में स्वतन्त्र कुमार अपर पुलिस अधीक्षक एसटीएफ केदिशा निर्देशन में अभियोग के अनावरण एंव अभियुक्तों की गिरफ्तारी हेतु एक टीम का गठन कर राजधानी देहरादून में प्रकरण में आरोपों की पुष्टी हेतु गोपनीय रुप पुलिस टीम रवाना कर जाँच कराई गई, तो मालूम हुआ कि अभियुक्तगणों द्वारा उत्तराखण्ड राज्य के बेरोजगार युवक युवतियों को वन विभाग में विभिन्न सरकारी पदों पर फर्जी नियुक्ती पत्र देकर भर्ती कराया जा रहा है तथा अन्य बेरोजगार युवक युवतियों को इस जाल में फंसाने के लिये नौकरी का प्रलोभन हेतु एक वाट्सअप ग्रुप भी चलाया जा रहा है। जिसके माध्यम से नौकरी सम्बंधी आदान प्रदान की जा रही हैं | विवेचक द्वारा वन विभाग में भर्ती के नाम पर ठगे गये पीड़ितों की जानकारी कर कथन अंकित किये गये तथा अभियुक्तगणों द्वारा चलाये जा रहे वाट्सअप ग्रुप की जानकारी की गयी तो, प्रकाश में आया कि अपराधियों द्वारा उत्तराखण्ड के बेरोजगार युवक युवतियों को सरकार के विभिन्न प्रोजेक्ट जैसे नमामी गंगे, उत्तराखण्ड पावर कार्पोरेशन व वन विभाग में वन बीट अधिकारी, वन दरोगा, लोवर डिविजन क्लर्क, एकाउन्टेट आदि के पदों पर भर्ती करने को लेकर प्रलोभन दिया जा रहा था। अभियुक्तगणों द्वारा इस कार्य हेतु अलग ग्रुप बनाया गया था तथा इस पर स्वयं को वन विभाग में बड़े पदों पर आसीन बताकर धोखाधड़ी कर लोगों को ठगा जा रहा था। इस विषय में तत्काल उन्नत साईबर तकनीक का प्रयोग करते हुये पुलिस टीम द्वारा अभियुक्तों का पता कर देहरादून से ’अभियोग का सरगना सुमितानन्द भट्ट पुत्र सीताराम भट्ट निवासी ग्राम ककोला पो0ऑ0 परकंडी, जनपद रुद्रप्रयाग तथा विपुल वर्मा निवासी अजबपुर खुर्द, थाना नेहरु कालोनी, जिला देहरादून को गिरफ्तार किया गया । तलाशी में अभियुक्त के कब्जे से वन विभाग में विभिन्न पदों पर वन विभाग के फर्जी लैटर पैड पर दर्जनों युवक युवतियों के नाम जारी नियुक्ति पत्र व अन्य दस्तावेज, शैक्षिक प्रमाण पत्र, विभिन्न बैंकों के खातों से सम्बन्धित चैक बुक, एटीएम कार्ड, डोंगल, रबर मुहर वन विभाग उत्तराखण्ड सरकार व उत्तराखण्ड पावर कार्पोरेशन, कैमरा आदि बरामद हुआ ।
नौकरी लगाने के नाम पर लेता था 3 से 5 लाख
अभियुक्त ने प्रारम्भिक पूछताछ में बताया, कि वह अपने साथियों के साथ उत्तराखण्ड के बेरोजगार युवक युवतियों को विभिन्न सरकारी प्रोजेक्ट नमामी गंगे व उत्तराखण्ड पावर कार्पोरेशन व वन विभाग में वन बीट अधिकारी, वन दरोगा, लोवर डिविजन क्लर्क, एकाउन्टेट आदी के पदों पर भर्ती करने का लालच देते थे, उसका एक साथी टिहरी गढ़वाल निवासी एक साथी विक्की सिंह राणा जिसने विज्ञान परास्नातक (वानिकी) में मास्टर डिग्री प्राप्त की गई है । जिसे वन विभाग की अच्छी जानकारी है। जिसके सहयोग से हमनें राज्य के बेरोजगार युवक युवतियों को वन विभाग व अन्य में विभिन्न पदों नौकरी के नाम पर प्रलोभन दिया गया तथा प्रत्येक बेरोजगार से पद के हिसाब से नौकरी दिलाने के नाम पर 3 लाख से 5 लाख रुपये की धोखाधड़ी की गई है । दिखावे के लिये उनको वाट्सअप ग्रुप में जोडकर उनको नौकरी व ट्रैनिंग के सम्बन्ध में दिशा निर्देश दिये गये तथा नियुक्ति पत्र जारी किये गये। जिन युवक युवतियों ने अभियुक्त पर नौकरी नही दिलाने पर दबाब बनाया उनको सैलरी के नाम पर 15 हजार से 18 हजार रुपये महीने के हिसाब से वेतन भी दिया गया । अपराधियों के झाँसे में बेरोजगारो की अधिक संख्या हो जाने पर उनके द्वारा दो चरणों में देहरादून में वन विभाग की ट्रेनिंग भी दिलायी गयी । गिरफ्तार अभियुक्त से पूछताछ में उसके साथी की जानकारी कर एक अन्य अभियुक्त विक्की सिंह राणा पुत्र धनवीर सिंह राणा निवासी 20 अमकोटी, पौड़ी गढ़वाल हाल किरायेदार मनीष लेखवार, निकट चिल्ड्रन पब्लिक स्कूल ढ़ालवाला, थाना मुनि की रेती, जनपद टिहरी गढ़वाल को ढालवाला, ऋषिकेश से गिरफ्तार किया गया। अभियुक्त विक्की सिंह राणा ने पूछताछ में बताया कि वह तथा सुमितानन्द भट्ट स्वंय को बेरोजगार युवक युवतियों के समक्ष अपना प्रभाव छोड़ने हेतु स्वंय को वन विभाग में प्रमुख वन संरक्षक व सहायक वन संरक्षक बनकर अपना प्रभाव डालते थे ।
यहां तक की इन्होने अपनी गाडियों के लिये भी नेम प्लेट भी बनायी है, बरामद नेम प्लेट में वन विभाग का लोगो व ए0सी0ए0 मुख्यालय देहरादून लिखा है । गाडी की इस नेम प्लेट का प्रयोग अपराधीगण गढ़वाल परिक्षेत्र के पहाड़ी जिलों में आम जनता में अपना रुतबा डालने व भर्ती के नाम पर ठगी करने हेतु करते थे । अभियुक्तो द्वारा अपने इस कृत्य में अन्य अभियुक्तों के संलिप्त रहने तथा अब तक दर्जनों बेरोजगार युवक युवतियों से नौकरी के नाम पर ठगी कर 25 लाख रुपये से अधिक की धोखाधड़ी करना स्वीकार किया है’। जिस सम्बन्ध में विवेचना प्रचिलित है एंव अग्रेत्तर कार्यवाही की जा रही है । अभियुक्तगणों को माननीय न्यायालय में पेश कर न्यायालय के आदेशानुसार जिला कारागार देहरादून में भेज दिया गया है।