कोरोना संक्रमण से निपटने के लिये हर संभव कौशिश, एनडीआरएफ मद से 85 करोड़ जारी, आर्थिकी सुधार के लिये उच्च स्तरीय समिति गठित

देहरादून, प्रदेश में कोविड-19 कोरोना वायरस के संक्रमण को रोकने और बचाव कार्यों के लिए हर सम्भव कोशिश की जा रही है। मुख्यमंत्री श्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत लगातार हालात की समीक्षा कर रहे हैं। मुख्य सचिव स्तर पर भी स्थिति की लगातार माॅनिटरिंग की जा रही है।

उत्तराखंड मे लाॅकडाऊन सख्ती से लागू किया गया

सम्पूर्ण उत्तराखंड को आपदा प्रभावित घोषित किया गया। राज्य में लाॅकडाउन को सख्ती से लागू कर दिया गया। दूसरे प्रदेशों के साथ सीमा को सील करने के साथ ही एक जिले से दूसरे जिले में जाने पर भी रोक लगाई गई। मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव स्तर पर स्थिति की लगातार माॅनिटरिंग की जा रही है।

मुख्यमंत्री, मंत्री और विधायकों के वेतन में 30 प्रतिशत कटौती, विधायक निधि में भी कटौती

राज्य कैबिनेट द्वारा 50  करोङ रूपए की स्वीकृति दी गई। मा0 मुख्यमंत्री, मंत्री और समस्त विधायक गणों के वेतन में  30 प्रतिशत कटौती, कोविड-19 फन्ड के लिए किया जायेगा तथा आगामी दो वर्षो में विधायक निधि के अन्तर्गत एक-एक करोड रूपये की कटौती कोविड-19 फन्ड के लिए की जाएगी।

कोरोना से लङने के लिए धनराशि निर्गत

कोरोना वायरस से निपटने के लिए एसडीआरएफ मद से 85 करोङ रूपए जारी किए गए हैं। इसमें हर जिले को 5-5 करोङ रूपए कोरोना वायरस के संक्रमण से बचाव की तैयारियों के लिए जबकि 20 करोङ रूपए चिकित्सा शिक्षा विभाग को कोरोना नोटिफाईड अस्पतालों के सुदृढ़ीकरण और आवश्यक उपकरणों की व्यवस्था के लिए दिए गए हैं।

कोरोना वायरस की रोकथाम हेतु चिह्नित किए गए राजकीय मेडिकल कालेजों को सुदृढ़ किए जाने और उनकी क्षमता में वृद्धि किए जाने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री राहत कोष से चिकित्सा शिक्षा विभाग को 10 करोङ रूपए अवमुक्त किए गए हैं।

कोरोना वारियर्स को 10 लाख का कवर

कोविड- 19 कोरोना वायरस संक्रमण की रोकथाम और बचाव कार्यों में लगे सभी सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों (संविदा, आउटसोर्स आदि) एवं सभी कोरोना वारियर्स जो कि कोविड-19 कोरोना संक्रमण से बचाव एवं राहत कार्यों में तैनात हैं, यदि वे संक्रमित होते हैं तो उनके उपचार का व्यय राज्य सरकार द्वारा किया जाएगा। उनके जीवन की क्षति होने पर उनके आश्रित को मुख्यमंत्री राहत कोष से सीधे 10 लाख रूपए की राहत/सम्मान राशि के दी जाएगी।
स्वास्थ्य विभाग समय समय पर गाइडलाइन जारी करता है जिसे मीडिया के माध्यम से आमजन तक पहुंचाया जा रहा है।

निजी चिकित्सा संस्थाओं से समन्वय

आवश्यकता होने पर अर्धसैनिक बलों, एनसीसी के उपयोग के लिए उच्च स्तर पर समन्वय बैठक कर योजना बनाई गई है। निजी चिकित्सा संस्थानों के सहयोग के लिये इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के साथ समन्वय स्थापित किया गया है। निजी अस्पतालों व नर्सिंग होम को ओपीडी खुली रखने के निर्देश। सामान्य जन की कठिनाई को कम करने के लिए हर सम्भव प्रयास किए गए हैं।

प्रदेश में अभी कोरोना से कोई मृत्यु नहीं, 5 मरीज ठीक होकर डिस्चार्ज

उत्तराखंड में  14 अप्रैल तक यहाँ कुल 37 पॉजिटिव केस पाए गए। इनमें से 9 ठीक होकर डिस्चार्ज हो चुके हैं। अभी तक उत्तराखंड में कोरोना से एक भी मृत्यु नहीं हुई है। 2174 सेम्पल टेस्ट भेजे गए। इनमें से 1868 की रिपोर्ट निगेटिव आई है। होम और इंस्टीट्यूशनल क्वारेंटाईन में 55 हजार से अधिक व्यक्ति हैं।

प्रदेश में कोरोना के लिए डेडिकेटेड अस्पताल

डेडिकेटेड कोविड-19 अस्पताल नोटिफाईड किए गए हैं। बागेश्वर, चमोली, चम्पावत, पिथौरागढ़, रुद्रप्रयाग, ऊधमसिंहनगर, टिहरी, उत्तरकाशी के जिला चिकित्सालय, अल्मोड़ा का बेस चिकित्सालय, दून मेडिकल कालेज, मेला चिकित्सालय हरिद्वार, सुशीला तिवारी मेडिकल कालेज, बी डी पाण्डे चिकित्सालय नैनीताल, बेस चिकित्सालय कोटद्वार व श्रीनगर मेडिकल कालेज इनमें शामिल हैं।

कोविड-19 की दृष्टि से 400 से अधिक चिकित्सकों की नियुक्ति की गई है।

एम्स ऋषिकेश और हल्द्वानी मेडिकल कालेज में सेम्पल टेस्ट किए जा रहे हैं। जल्द ही और भी टेस्टिंग लेब शुरू कर दी जाएगी।

दिनांक 14 अप्रैल तक कोरोना पाजिटिव के लिए आइसोलेशन बेड 805 हैं, सभी जिलों में क्वारेंटाईन फेसिलिटी में 19220 बेड हैं। आईसीयू बेड 483 हैं। रोज इन सुविधाओं में बढोतरी हो रही है।

आवश्यक उपकरणों की मांग से अधिक है  उपलब्धता

दिनांक 14 अप्रैल तक कुल पीपीई किट 31959 हैं, कोरोना मरीजों के लिए अभी 266 वेंटिलेटर आरक्षित हैं जबकि  42295 एन 95 मास्क उपलब्ध हैं। इनकी उपलब्धता भी बढ रही है।

लाॅकडाऊन में आमजन को राहत के लिए व्यवस्था

आमजन को राहत पहुंचाने के लिए कई कदम उठाए गए हैं।
सभी सम्भावित कोरोना वायरस संक्रमित लोगों का अटल आयुष्मान उत्तराखंड योजना में निशुल्क ईलाज किया जा रहा है। राज्य में कोरोना संक्रमितों का पूरा उपचार किया जा रहा है। स्कूलों को लाकडाऊन की अवधि में फीस मांगने पर रोक लगाई है।

राज्य के खाद्य तेल विनिर्माताओं को 50 प्रतिशत स्टाक राज्य के लिए आरक्षित रखने के निर्देश दिये हैं।

सार्वजनिक वितरण प्रणाली में राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा योजना के तहत अन्त्योदय अन्न योजना व प्राथमिक परिवारों के लिए अप्रैल से जून तक प्रति व्यक्ति प्रति माह 5 किलो चावल का अतिरिक्त आवंटन निशुल्क किया जा रहा है।

पेयजल एवं सीवर सुविधा के सभी प्रकार के उपभोक्ताओं के देयों की वसूली 31 मई तक स्थगित की गई है। बिजली उपभोक्ताओं को भी राहत दी गई है।
बाजार में आटे की पर्याप्त उपलब्धता रहे, इसके लिए आटा मिलों का निरंतर संचालन सुनिश्चित किया गया है। भारतीय खाद्य निगम डिपो से राज्य में कार्यरत आटा मिलों को गेहूँ आवंटित करवाया जा रहा है।
राशन की दुकानों को गेहूँ, चावल, चीनी, दाल व मिट्टी तेल के साथ ही पैक्ड आटा, खाद्य तेल, अन्य दालें, आयोडाइज्ड नमक, चाय, मसाले, साबुन, टूथपेस्ट, माचिस, मोमबत्ती, सेनेटाइजर, मास्क की उपलब्धता सुनिश्चित कराई जा रही है।

वरिष्ठ नागरिकों, बीमार व्यक्तियों, गर्भवती महिलाओं के लिए आवश्यक वस्तुओं की उपलब्धता घर पहुंचाकर की जा रही है।
ईएसआई में पंजीकृत श्रमिकों को प्रतिमाह एक हजार रू दिए जा रहे हैं। ऐसे श्रमिक जो पंजीकृत नहीं हैं, और अन्य ज़रूरतमंदों की तत्काल सहायता के लिए जिलाधिकारियों को सीएम राहत कोष से कुल मिलाकर 30 करोङ रूपए दिये गये।

कृषि से संबंधित उत्पादों और पशु आहार को भी आवश्यक वस्तुओं में शामिल किया गया है।

सहकारी बैंकों से फसलों एवं कृषि के लिए किसानों द्वारा लिए गए ऋण के भुगतान हेतु 3 माह की समयावधि बढ़ा दी गई है|
प्रदेश में इस तरह के लगभग तीन लाख 50 हजार किसान हैं जिन्होंने विभिन्न योजनाओं के तहत ऋण लिया है|
खाद्यान सुरक्षा योजना के अन्तर्गत सभी नागरिकों को पर्याप्त राशन उपलब्ध कराने का निर्णय लिया गया। इसके तहत अन्त्योदय योजना के अन्तर्गत 35 किग्रा0 राशन गेहूँ और चावल के रूप में 03 माह का राशन उपलब्ध रहेगा।
खाद्यान सुरक्षा योजना सफेद कार्ड धारक को प्रति यूनिट 05 किग्रा0 चावल, दाल फ्री उपलब्ध कराया जाएगा।
उन दोनों कार्ड से अलग 40 लाख युनिट वाले 10 लाख राशन कार्ड धारकों को 7.5 किग्रा0 राशन की मात्रा को दोगुना कर 15 किग्रा0 राशन कार्ड धारकों को अप्रैल, मई, और जून तीन माह के लिए वितरण किया जाएगा। जिसके पास कोई भी राशन कार्ड नही होगा उन्हे राशन किट दिया जाएगा।

कोरोना से बचाव कार्यों की  मानिटरिंग

कोरोना वायरस की लेटेस्ट स्थिति और किए जा रहे प्रयासों की मुख्यमंत्री व मुख्य सचिव स्तर से लगातार माॅनिटरिंग की जा रही है। जिलों में जिलाधिकारी तो काम कर ही रहे हैं, कोरोना वायरस (COVID-19) की रोकथाम, प्रभावी नियंत्रण एवं अनुश्रवण हेतु राज्य के मंत्रीगणों एवं राज्यमंत्रियों को उत्तराखण्ड के जनपदों का प्रभारी नियुक्त किया गया है। इस क्रम में कैबिनेट मंत्री श्री सतपाल महाराज को हरिद्वार, श्री सुबोध उनियाल को टिहरी व उत्तरकाशी, डॉ हरक सिंह रावत को पौड़ी, श्री अरविन्द पाण्डेय को चम्पावत व पिथौरागढ़, श्री यशपाल आर्य को अल्मोड़ा व नैनीताल एवं श्री मदन कौशिक को देहरादून व उधमसिंह नगर, राज्यमंत्री डॉ धनसिंह रावत को रुद्रप्रयाग व चमोली एवं श्रीमती रेखा आर्या को बागेश्वर का प्रभारी नियुक्त किया गया है।

असहयोग करने पर सख्त कार्रवाई

कोरोना वायरस को रोकने में प्रशासनिक कार्यवाही का विरोध करने वालों पर डिजास्टर मैनेजमेंट एक्ट 2005 के तहत कङी कार्रवाई की जा रही है।  क्वारेंटाईन किए गए लोग अगर छुपते हैं या कोई उन्हें छुपाते हैं तो छुपने वाले व छुपाने वाले दोनों पर सख्त एक्शन।  दिनांक 14 अप्रैल 2020 तक प्रदेश में अभी तक कुल 1534 अभियोगों 6109 अभियुक्तों को गिरफ्तार किया गया है। इसके साथ ही अभी तक एमवी एक्ट के अन्तर्गत कुल 16608 वाहनों के चालान, 4200 वाहन सीज एवं 79.01 लाख रूपये शुल्क वसूला गया।

राज्य की आर्थिकी में सुधार के लिए उच्च स्तरीय समिति गठित

मुख्यमंत्री श्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत के निर्देश पर बनाई समिति लाॅकडाउन के बाद आर्थिक संसाधनों व आजीविका में सुधार के लिए सुझाव देगी। लाॅकडाऊन से राज्य की अर्थव्यवस्था को हुए नुकसान का अध्ययन कर  राज्य के आर्थिक संसाधनों में सुधार लाने के लिए संस्तुतियां देगी। इस पर भी विचार किया जाएगा कि लोगों को आजीविका उपलब्ध कराने के लिए किन क्षेत्रों को सर्वोच्च प्राथमिकता देनी होगी। समिति जल्द से जल्द अपनी रिपोर्ट राज्य सरकार को देगी।