दून मैराथन के लिये द्वितीय विश्व युद्ध के समय की साइकिल से सफर

देहरादून में उत्तराखंड पुलिस द्वारा ड्रग्स के दुष्परिणामो के प्रति जागरूकता जागृत करने के उद्देश्य से आयोजित मैराथन के प्रसार के लिये बिना किसी प्रचार के देहरादून निवासी पोस्टमैन दिल्ली तक दूसरे विश्व युद्ध के समय की साइकिल से राष्ट्रीय राजधानी के इंडिया गेट तक इस मुहिम की चिठ्ठी से पैगाम छोड़ आए, पिछले दिन अचानक इस साइक्लिस्ट को इस सफर का जुनून शुरू हुवा और समाज में फैलते ड्रग्स रूपी जहर को रोकने के लिये वह तड़के निकल पड़े और अंततः कठनाइयों से भरपूर रोमांच भरे इस पैगाम को पहुचाने में ये 56 वर्षिय एथलीट “विनोद सकलानी” सफल हुआ ।

देहरादून से देल्ही तक के 270 किमी के इस सफर को पूरा करने में 12:30 घंटे का समय लगा जिसमें लगभग 4 घंटे उन्होंने इस मैराथन के प्रचार और भोजन आदि में व्यय किया ।

एक बार मुज्जफर नगर के पास अचानक तेज पीड़ा और मसल्स में खिंचाव के कारण उन्हें लगा की उनका यह पैगाम राजधानी तक ना पहुँच पायेगा

परन्तु उत्तराखंड पुलिस के इस महाअभियान के प्रति मेरे मन की दृढ़ शक्ति ने मुझे हिमंत ना हारते हुए साइकिल चलाने के लिये प्रेरित किया और गत वर्ष पहनी मैराथन की जरसी ने उन्हें हौसला देकर इस जरसी को पुनः इंडिया गेट तक लहराने के लिये जोश भरा, और आख़िरकार साधारण सी साइकल से रास्ट्रीय राजमार्ग इस मुहीम का गवाह बना।