राफेल का मुकाबला करने की तैयारी में चीन, कर रहा है सुपरसोनिक स्टील्थ बॉम्बर का ट्रायल

नई दिल्ली. पूर्वी लद्दाख में हुए संघर्ष के बाद आसमानी ताकत में भारत को मिली बढ़त का मुकाबला करने के लिए चीन के नया प्लान बनाया है. चीन भारतीय लड़ाकू विमान राफेल का मुकाबला करने के लिए सुपरसोनिक स्टील्थ बॉम्बर की तैनाती में जुटा हुआ है. बीते मंगलवार से चीन ने ईस्टर्न लद्दाख के अपोजिट Hotan एयरबेस पर इसका ट्रायल शुरू कर दिया है. आधिकारिक जानकारी के मुताबिक चीन का ये ट्रायल 22 जून तक चलेगा.

इसी दिन कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ चाइना (CPC)के 100 साल भी पूरे हो रहे हैं. सुपरसोनिक स्टील्थ बॉम्बर H-20 को “गेम चेंजर” माना जा रहा है. अगर इसका फाइनल ट्रायल उम्मीदों के मुताबिक हो जाता है तो चीन अमेरिका और रूस के बाद स्टेल्थ टेक्नोलॉजी हासिल करने वाला दुनिया का तीसरा देश बन जाएगा. ऐसे में भारत के लिए चीन का ये सुपरसोनिक स्टील्थ बॉम्बर बड़ी चुनौती और खतरा है.

चीन के लिए क्यों खास है एच-20?

एच-20 को न्यूक्लियर पेलोड ले जाने में सक्षम माना जाता है. साथ ही ये दुश्मन के एयर डिफेंस और रडार को चकमा दे सकता है. जानकारों के मुताबिक इस सुपरसोनिक जेट की “beyond visual range” 3000km की है. ऐसे में ये अफगानिस्तान, बलोचिस्तान या फिर लद्दाख की सीमा में घुसे बगैर टार्गेट्स को हिट कर सकता है. एच-20 प्रॉजेक्ट की शुरुआत चीन ने 2010 में की थी जब भारत फ्रांस के Dassault aviation से 126 रफाल जेट के लिए निगोशिएट कर रहा था.

2025 तक वायुसेना में शामिल करने का रखा था लक्ष्य

चीन ने एच-20 बॉम्बर्स को 2025 तक अपनी वायुसेना में शामिल करने का लक्ष्य रखा था, लेकिन इस टाइम लाइन को कम कर दिया गया है. ये लगातार बदलते वैश्विक परिवेश में चीन की रणनीति और उसकी सोच की ओर इशारा करता है. आने वाले वक्त में इसका असर साउथ चाइना सी और ताइवान के मुद्दों पर भी देखने को मिल सकता है जहां अमेरिकी गठबंधन इस इलाके में चीन की दादागिरी को बैलेंस करने में जुटे हुए हैं

टॉप सोर्सेज के मुताबिक एच-20 बॉम्बर्स को चीन “Area specific asset” के तौर पर इस्तेमाल करना चाहता है उसका अंदाज़ा इस बात से लगाया जा सकता है कि इसके फाइनल ट्रायल के लिए चीन ने ईस्टर्न लद्दाख के अपोजिट Hotan एयरबेस को चुना है. यहां से चीन अफगानिस्तान, बलोचिस्तान या लद्दाख में टारगेट को हिट कर सकता है.