BSP नहीं, भीम आर्मी है दलितों की शुभचिंतक – चंद्रशेखर

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कभी खुद को बहुजन समाज पार्टी सुप्रीमो मायावती का बेटा बताने वाले भीम आर्मी प्रमुख चंद्रशेखर आजाद का अब उन पर ही हमलावर हो गए हैं. देश में चल रहे लोकसभा चुनाव के बीच चंद्रशेखर ने मायावती पर निशाना साधते हुए रविवार को कहा कि पूरे देश में दलितों की शुभचिंतक बीएसपी नहीं मेरी पार्टी (भीम आर्मी) है. बता दें कि चंद्रशेखर रविवार को बाबा साहेब डॉक्टर भीमराव आंबेडकर की 128वीं जयंती के अवसर पर उनकी जन्मस्थली महू में उनकी प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित करने पहुंचे थे. इसी दौरान उन्होंने यह बयान दिया.

महू में आंबेडकर प्रतिमा पुष्पांजलि अर्पित करने आए चंद्रशेखर ने कहा, ‘बाबा साहेब ने कुछ बड़े-बड़े सपने देखे थे, जो अब तक पूरे नहीं हुए हैं. इसलिए मैं यहां पर आया हूं और मैं उनके इन सपनों को पूरा करूंगा.’ साथ ही उन्होंने कहा, ‘मायावती की पार्टी दलितों के हितों की रक्षा नहीं करती है. असलियत में समूचे देश में दलितों की शुभचिंतक मेरी पार्टी (भीम आर्मी) है, ना कि बीएसपी.’ भीम आर्मी के संस्थापक चंद्रशेखर आजाद का नाम मई 2017 में सहारनपुर के शब्बीरपुर में दलित और राजपूत के बीच हुए जातीय संघर्ष में सामने आया. इस घटना के बाद जून 2017 में ही चंद्रशेखर की गिरफ्तारी हुई और उन पर योगी सरकार ने रासुका लगाया था. नवबंर 2018 में कोर्ट से जमानत मिलने के बाद चंद्रशेखर जेल से बाहर आए और इसके बाद से वो सक्रिय हैं.

चंद्रशेखर आजाद समय-समय पर खुद को दलितों का सबसे बड़ा नेता बताने की कोशिश करते रहे हैं. बीते साल 2 अप्रैल को दलितों के ‘भारत बंद’ के दौरान भी उन्होंने अपनी सक्रियता को दर्ज कराया था. इसके अलावा भी कई मौकों पर वो खुद को यूपी में दलितों के झुकाव वाली मायावती की बहुजन समाज पार्टी का हितैषी बताने की कोशिश करते दिखे हैं. वहीं दूसरी ओर मायावती ने उन्हें बीजेपी का ‘एजेंट’ करार दिया. इस बीच चंद्रशेखर ने ऐलान किया था कि वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ उत्तर प्रदेश की वाराणसी लोकसभा सीट से चुनाव लड़ेंगे.

बता दें कि पश्चिमी यूपी के दलित युवाओं के बीच चंद्रशेखर की अच्छी पकड़ मानी जाती है. इसके बावजूद मायावती उन्हें तवज्जो नहीं दी है. जबकि चंद्रशेखर लगातार कहते रहे है कि मायावती को दलित समुदाय की नेता हैं. चंद्रशेखर ने मायावती के बुआ कह कर संबोधित किया था. मायावती की ओर से कभी भी चंद्रशेखर के किसी बयान पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी. शायद यही वजह हो सकती है कि चंद्रशेखर अब मायावती पर निशाना साधने रहे हैं.