आतंकवाद का कोई धर्म नही होता पर शहीदों की जाति मिल गयी, पढ़िए कारवां मैगज़ीन की धूर्तता के बारे में विस्तार से

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देश में बौद्धिक आतंकवादियों की कोई कमी नहीं है इसका ताजा उदाहरण आपको कारवां पत्रिका के एक लेख में मिल जायेगा जिसमे पुलवामा हमले में शहीद सैनिकों की जाति बताकर देश में माहौल ख़राब करने की कोशिस की जा रही है। कारवां के इस लेख के शीर्षक में लिखा था “हिंदुत्व राष्ट्रवाद को चलाने वाले शहरी उच्च-जातियों का पुलवामा के मारे गए जवानों में बहुत कम प्रतिनिधित्व है” उसके बाद जातियों के बारे में लिखा है। दुःख की इस घडी में कारवां के पत्रकार आज़ाद अशरफ ने शहीदों के घर – घर फ़ोन करके उनसे उनकी जाति पूछी और फिर कारवाँ पत्रिका में जाति के आधार पर इस तरह का वर्गीकरण प्रकाशित किया ! इस तरह का वर्गीकरण एक बेहद ही शर्मनाक सोच है !

पुलवामा हमले में शहीद 40 जवानों की जाति को लेकर कारवां में छपी रिपोर्ट पर सीआरपीएफ ने कड़ी नाराजगी जताई है. दुनिया के सबसे बड़े अर्द्धसैन्य बल ने अपने मुख्य प्रवक्ता के टि्वटर हैंडल के जरिये कहा है, “सीआरपीएफ में हमारी पहचान भारतीय के तौर पर है…जाति-धर्म मायने नहीं रखता.”

मुख्य प्रवक्ता और उप महानिरीक्षक (डीआईजी) एम. दिनाकरण ने ट्वीट किया, “सीआरपीएफ में हमारी पहचान भारतीय के तौर पर है…जाति, रंग और धर्म का यह दयनीय विभाजन हमारे खून में मौजूद नहीं है.” उन्होंने खबर को भी टैग करते हुए कहा कि शहीदों का अपमान नहीं करना चाहिए. रिपोर्ट में आंकड़ों के रूप में इस्तेमाल कर उनका अपमान नहीं करना चाहिए.

दिनाकरण के ट्वीट पर प्रतिक्रिया देते हुए रिटायर्ड मेजर गौरव आर्या लिखते हैं, “दिनकरण सर, आप पर गर्व है. आपके एक ट्वीट ने निंदनीय लेख को खारिज कर दिया. जब कोई जवान एक बार वर्दी पहन लेता है, वह अपनी अन्य पहचान छोड़ देता है. वह सिर्फ भारतीय होता है. जब उसका पार्थिव शरीर तिरंगे में लिपटा हुआ वापस आता है तो वह भारत मां का बेटा होता है.”

राष्ट्रहित को ताक में रखने वाले पत्रकारों को सबक सिखाया जाना चाहिए सरकार को चाहिए की ऐसे तत्वों की पहचान करके इन्हे दण्डित किया जाये। इस पत्रिका का बौद्धिक आतंकवादी समूह इसे सही साबित करने के लिए एक हो चुका है और लगातार जस्टिफाई कर रहा है। इन पत्रकारों ने कभी आतंकवादी की जाति धर्म का पता नहीं किया। वहाबी या देवबंदी ढूंढ़ने की कोशिश नहीं की।

ये वही कारवां मैगज़ीन है जिसने राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल को निशाना बनाने के लिए उनके बेटे पर एक स्टोरी चलायी थी, अजित डोभाल के बेटे विवेक ने कारवां पत्रिका के खिलाफ मानहानि मामले में अदालत में दर्ज किया है ! इसके अलावा राजनीतिक हलकों में कारवाँ पत्रिका को नरेन्द्र मोदी का धुर विरोधी बताया जाता रहा है और एक ख़ास विचारधारा का समर्थन करने का भी आरोप लगता रहा है !