भाजपा विधायकों ने लिया पांचों सीटों पर जीत का संकल्प

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देहरादून। लोकसभा चुनाव की जंग में भाजपा विधायक भी अपरोक्ष चुनौती से जूझेंगे। उन पर अपने-अपने हलकों में बेहतर परफाॅरमेंस का दबाव है। वजह साफ है। प्रचंड बहुमत के साथ राज्य में राजपाट चला रही बीजेपी के पास 57 विधायकों की फौज है। इसलिए, प्रदेश की पांचों लोकसभा सीटों के परिणामों में विधायकों की परफाॅरमेंस भी अहम होगी। इसे देखते हुए विधायकों को नाराजगी व मनमुटाव से परे होकर पार्टी प्रत्याशी की जीत सुनिश्चित करने के लिए जुट जाने की हिदायत दी गई है। गुरुवार को प्रदेश भाजपा मुख्यालय में चल रही भाजपा विधायक मंडल की अहम बैठक का लब्बोलुआब कुछ इसी रूप में सामने आया।

भाजपा विधायक दल की बैठक में लोकसभा चुनाव में उत्तराखंड की पांचों सीटों पर भाजपा की विजय का संकल्प लिया गया। भाजपा विधायक दल की बैठक आज भाजपा प्रदेश कार्यालय पर हुई । बैठक की अध्यक्षता भाजपा प्रदेश अध्यक्ष अजय भट्ट ने की। बैठक में केंद्रीय मंत्री व प्रदेश लोकसभा चुनाव प्रभारी थावर चंद गहलोत, मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ,प्रदेश सरकार के मंत्री, विधायक, प्रदेश महामंत्री उपस्थित थे।

हालांकि, कैबिनेट मंत्री अरविंद पांडेय, सतपाल महाराज व विधायक ऋतु खंड़ूड़ी ने बैठक में भाग नहीं लिया। बैठक के बाद पत्रकारों से बातचीत में अजय भट्ट ने बताया कि प्रत्येक विधायक को उनके क्षेत्रों का प्रभारी बनाया गया है। विधायकों से अपेक्षा की गई है कि वे केंद्र व प्रदेश सरकार की उपलब्धियों को सामान्य जन तक पहुँचाने के साथ साथ कांग्रेस द्वारा किए जा रहे दुष्प्रचार का भी उत्तर दें। उन्होंने कहा कि बैठक में सभी विधायकों ने लोकसभा चुनाव में भाजपा द्वारा उत्तराखंड की पांचों सीटों पर 2014 के समान विजय प्राप्त करने और नरेंद्र मोदी को पुनः प्रधानमंत्री बनाने का संकल्प लिया। भट्ट ने कहा कि सभी विधायक पार्टी कोष में कमसे कम एक माह का वेतन प्रदान करेंगे। कुछ विधायकों ने आज बैठक में चेक के माध्यम से योगदान भी दिया।

इस बीच, मजेदार बात यह है कि पार्टी विधायकों पर बेहतर परफाॅरमेंस का यह दबाव ऐसे समय पर आ पड़ा है, जब सरकार में तवज्जो के सवाल पर उनमें निराशा का माहौल है। लंबे इंतजार के बाद प्रदेश मंत्रिमंडल की दो बर्थ अभी भी खाली है। सरकार में दायित्वों का आवंटन हुआ तो उसमें भी विधायकों के हाथ खाली ही रह गए। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत लोकसभा चुनाव की घोषणा से ऐन पहले तक दायित्वों के आवंटन को लेकर छोटी-बड़ी चार सूसियां जारी कर चुके हैं, लेकिन इन सूचियों में एक भी पार्टी विधायक का नाम नहीं रहा। मुख्यमंत्री ने कैबिनेट व राज्य मंत्री स्तरीय दायित्वों के आवंटन में अपने विधायकों की बजाए संगठन से सीधे जुड़े पदाधिकारियों व पार्टी के सक्रिय नेताओं व कार्यकर्ताओं को ही तवज्जो दी है। जबकि, बीजेपी विधायक दायित्वों के बहाने ही अधिक से अधिक संख्या में सरकार में एडजस्ट हो जाने की उम्मीद पाले हुए थे। ऐसा तो हुआ नहीं, अब लोकसभा चुनाव में अपने हलकों में पार्टी की चमकीली परफाॅरमेंस दिखाने का दबाव विधायकों पर आ गया है।

सूत्रों के अनुसार विधायक मंडल दल की बैठक में हलकावार लोकसभा चुनाव को लेकर पार्टी की स्थिति और जीत के समीकरणों पर मंथन हुआ। साफ किया गया कि वर्ष 2014 के नतीजों का इतिहास दोहराने की चुनौती हमारे सामने है। प्रदेश में पार्टी विधायकों की संख्या विपक्ष से कहीं आगे है, इसलिए लोकसभा नतीजे भी हमारे पक्ष में होने चाहिए। साफ संदेश दिया गया कि विधायक अपने-अपने निर्वाचन हलकों में संगठन व कार्यकर्ताओं से बेहतर तालमेल के साथ पार्टी प्रत्याशियों की जीत के लिए पूरी तत्परता व सजगता से जुट जाएं। बैठक में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष अजय भट्ट व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत समेत मंत्री व विधायक भाग ले रहे हैं।