सफरनामा : अमिताभ बच्चन (Amitabh Bachchan)

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(ए बिट फॉर टीम की रपट) 40 दशकों से लगातार हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में बतौर अभिनेता काम करने वाले अमिताभ बच्चन सिर्फ अभिनेता ही नहीं एक लीजेंड भी हैं एक समय अमिताभ बच्चन को उनकी फिल्मों से ‘एंग्री यंग मैन’ की उपाधि प्राप्त हुई, वे हिन्दी सिनेमा के सबसे बड़े और सबसे प्रभावशाली अभिनेता माने जाते हैं। उन्हें लोग ‘सदी के महानायक’ के तौर पर भी जानते हैं और प्‍यार से बिगबी, शहंशाह भी कहते हैं। सर्वश्रेष्ठ अभिनेता के तौर पर उन्हें 3 बार राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिल चुका है। इसके अलावा 14 बार उन्हें फिल्मफेयर अवार्ड भी मिल चुका है। फिल्मों के साथ साथ वे गायक, निर्माता और टीवी प्रिजेंटर भी रहे हैं। भारत सरकार ने उन्हें पद्मश्री और पद्मभूषण सम्मान से भी नवाजा है।

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हरिवंश राय बच्चन के पुत्र अमिताभ बच्चन का जन्म उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद जिले में हुआ था। उनके पिता हिंदी जगत के मशहूर कवि रहे हैं। उनकी मां का नाम तेजी बच्चन था। उनके एक छोटे भाई भी हैं जिनका नाम अजिताभ है। अमिताभ का नाम पहले इंकलाब रखा गया था लेकिन उनके पिता के साथी रहे कवि सुमित्रानंदन पंत के कहने पर उनका नाम अमिताभ रखा गया।

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अमिताभ बच्चन शेरवुड कॉलेज, नैनीताल के छात्र रहे हैं। इसके बाद की पढ़ाई उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय के किरोरीमल कॉलेज से की थी। पढ़ाई में भी वे काफी अव्‍वल थे और कक्षा के अच्‍छे छात्रों में उनकी गिनती होती थी। कहीं ना कहीं ये गुण उनके पिताजी से ही आए थे क्‍योंकि वे भी जानेमाने कवि रहे थे।
अमिताभ बच्चन की शादी जया बच्चन से हुई जिनसे उन्हें दो बच्चे हैं। अभिषेक बच्चन उनके सुपुत्र हैं और श्वेता नंदा उनकी सुपुत्री हैं। रेखा से उनके अफेयर की चर्चा भी खूब हुई और लोगों के गॉसिप का विषय बनी।

करियर के शुरूआती दौर में उन्‍हें काफी दिक्‍कतों का सामना करना पड़ा था। उनकी फिल्‍में लगातार फलाप हो रही थीं तब वे वापिस घर लौटने का मन बना चुके थे लेकिन फिल्‍म जंजीर उनके करियर का टर्निंग प्‍वाइंट बन गई और फिल्‍म इंडस्‍ट्री में ‘एंग्री यंग मैन’ का उदय हुआ।

अमिताभ बच्चन की शुरूआत फिल्मों में वॉयस नैरेटर के तौर पर फिल्म ‘भुवन शोम’ से हुई थी लेकिन अभिनेता के तौर पर उनके करियर की शुरूआत फिल्म ‘सात हिंदुस्तानी’ से हुई। इसके बाद उन्होंने कई फिल्में कीं लेकिन वे ज्यादा सफल नहीं हो पाईं। फिल्म ‘जंजीर’ उनके करियर का टर्निंग प्वाइंट साबित हुई। इसके बाद उन्होंने लगातार हिट फिल्मों की झड़ी तो लगाई ही, इसके साथ ही साथ वे हर दर्शक वर्ग में लोकप्रिय हो गए और फिल्म इंडस्ट्री में अपने अभिनय का लोहा भी मनवाया। सात हिंदुस्तानी, आनंद, जंजीर, अभिमान, सौदागर, चुपके चुपके, दीवार, शोले, कभी कभी, अमर अकबर एंथनी, त्रिशूल, डॉन, मुकद्दर का सिकंदर, मि. नटवरलाल, लावारिस, सिलसिला, कालिया, सत्ते पे सत्ता, नमक हलाल, शक्ति, कुली, शराबी, मर्द, शहंशाह, अग्निपथ, खुदा गवाह, मोहब्बतें, बागबान, ब्लैक, वक्त, सरकार, चीनी कम, भूतनाथ, पा, सत्याग्रह, शमिताभ जैसी शानदार फिल्मों ने ही उन्हें सदी का महानायक बना दिया।

एक समय था जब अमिताभ को उनकी भारी आवाज के लिए नयी फिल्म नहीं मिल रही थी आज जिस अमिताभ बच्‍चन के आवाज की पूरी दुनिया कायल है, उनकी आवाज औरों से काफी जुदा और भारी थी, इस वजह से उन्‍हें कई निर्देशकों ने कई फिल्‍मों में अपनी कहानी को नैरेट तक करवाया। कई प्रोग्राम्‍स को उन्‍होंने भी होस्‍ट किया।

सफलता के समय जब उनकी फिल्‍में अच्‍छा बिजनेस कर रही थीं कि अचानक 26 जुलाई 1982 को कुली फिल्‍म की शूटिंग के दौरान उन्‍हें गंभीर चोट लगी गई। दरअसल, फिल्‍म के एक एक्‍शन दृश्‍य में अभिनेता पुनीत इस्‍सर को अमिताभ को मुक्‍का मारना था और उन्‍हें मेज से टकराकर जमीन पर गिरना था। लेकिन जैसे ही वे मेज की तरफ कूदे, मेज का कोना उनके आंतों में लग गया जिसकी वजह से उनका काफी खून बह गया और स्‍थिति इतनी गंभीर हो गई कि ऐसा लगने लगा कि वे मौत के करीब हैं ये वो वक्त था जब मंदिरो, मस्जिदों में अभिताभ के लिए दुआए मांगी गयी और अमिताभ सही सलामत दोवारा फिल्म इंडस्ट्री में लोट आये। कुली में लगी चोट के बाद उन्‍हें लगा कि वे अब फिल्‍में नहीं कर पाएंगे और उन्‍होंने अपने पैर राजनीति में बढ़ा दिए। उन्‍होंने 8वें लोकसभा चुनाव में अपने गृह क्षेत्र इलाहाबाद की सीट से उ.प्र. के पूर्व मुख्‍यमंत्री एचएन बहुगुणा को काफी ज्‍यादा वोटों से हराया।

हालांकि वो राजनीति में ज्‍यादा दिन नहीं टिक सके और फिर उन्‍होंने फिल्‍मों को ही अपने लिए उचित समझा। और उन्होंने फिल्म प्रोडूस के लिए कंपनी एबीसीएल बनायीं परन्तु उन्हें वहां भी सफलता नहीं मिली और कंपनी आर्थिक संकट से जूझ गयी तब उनके मित्र और राजनी‍तिज्ञ अमर सिंह ने उनकी काफी मदद की थी। बाद में अमिताभ ने भी अमर सिंह की समाजवादी पार्टी को काफी सहयोग किया। उनकी पत्‍नी जया बच्‍चन ने समाजवादी पार्टी को ज्‍वाइन कर लिया और वे राज्‍यसभा की सदस्‍य बन गईं। अमिताभ ने पार्टी के लिए कई विज्ञापन और राजनीतिक अभियान भी किए।

इसके बाद एक्टिंग शुरू की एक बार फिर उन्‍होंने हिट फिल्म दी ‘शहंशाह’ इसके बाद उनके अग्निपथ में निभाए गए अभिनय को भी काफी सराहा गया और इसके लिए उन्‍हें राष्‍ट्रीय फिल्‍म पुरस्‍कार भी मिला लेकिन उस दौरान बाकी कई फिल्‍में कोई खास कमाल नहीं दिखा स‍कीं।

एक बार फिर 2000 में आई मोहब्‍बतें उनके डूबते करियर को बचाने में काफी मददगार साबित हुई और फिल्‍म को और उनके अभिनय को काफी सराहा गया। इसके बाद उन्‍होंने कई फिल्‍मों में काम किया जिसे आलोचकों के साथ साथ दर्शकों ने भी काफी पसंद किया। फिल्‍म पा में उन्‍होंने अपने बेटे अभिषेक बच्‍चन के ही बेटे का किरदार निभाया। फिल्‍म को काफी पसंद किया गया और एक बार फिर उन्‍हें राष्‍ट्रीय फिल्‍म पुरस्‍कार से नवाजा गया। वे काफी लंबे समय से गुजरात पर्यटन के ब्रांड एंबेसडर भी हैं।

उन्‍होंने टीवी की दुनिया में भी बुलंदियों के झंडे गाड़े हैं और उनके द्वारा होस्‍ट किया गया कौन बनेगा करोड़पति बहुत पापुलर हुआ। इसने टीआरपी के सारे रिकार्ड तोड़ दिए और इस प्रोग्राम के जरिए कई लोग करोड़पति बने। बड़े पर्दे से छोटे परदे पर फ़िल्मी सितारों का आना ट्रैंड बन गया कभी फिल्म के लोग tv पर आना अपनी बेज्जती समझते थे अमिताभ की सफलता के बाद ये ट्रैंड ख़त्म सा हो गया।

वे शुद्ध शाकाहारी हैं और 2012 में ‘पेटा’ इंडिया द्वारा उन्‍हें ‘हॉटेस्‍ट वेजिटेरियन’ करार दिया गया। पेटा एशिया द्वारा कराए गए एक कांटेस्‍ट पोल में एशिया के सेक्सियस्‍ट वेजिटेरियन का टाईटल भी उन्‍होंने जीता।

आज का दौर सोशल मीडिया का है। खबरें पल पल में इंटरनेट पर अपलोड होती रहती हैं। ऐसे में हमारे बिगबी कहां पीछे रहने वाले हैं। वे भी फेसबुक, ट्विटर का जमकर इस्‍तेमाल करते हैं और यही कारण है कि दोनों सोशल नेटवर्किंग साइट्स पर उनके फैंस की संख्‍या लाखों-करोड़ों में है। वे अपने प्रंशसको को कभी नहीं निराश करते हैं और पल पल की घटनाओं को वे इन माध्‍यमों के जरिए शेयर करते हैं।

अपने जीवन में सफलताओं के साथ साथ उन्होंने असफलता का भी स्वाद चखा है जीवन में आयी दिक्कत्तों का डट कर सामना किया है उम्र के इस पड़ाव में भी अपने को न सिर्फ व्यस्त रखते है बल्कि आम लोगो के लिए आज भी प्रेरणा दायक रोल हैं