अगस्ता वेस्टलैंड घूसकांड: 2 विदेशी कंपनी, 3 दलाल और गांधी परिवार, जानें क्या है पूरा मामला

इस मामले की शुरुआत साल 1999 में हुई थी। उस वक्त देश में भाजपा के नेतृत्व वाली एनडीए की सरकार थी और अटल बिहारी वाजपेयी प्रधानमंत्री थे। तब एमआई-8 हेलिकॉप्टर के पुराने हो जाने पर भारत की वायु सेना ने वीवीआई लोगों के लिए नए हेलिकॉप्टर की जरूरत महसूस की। हेलिकॉप्टर को खरीदने से पहले कुछ शर्तें भी रखी गईं कि हेलिकॉप्टर कैसा होना चाहिए। उसमें क्या खासियतें होनी चाहिए। 

तब कहा गया कि हेलिकॉप्टर ऐसे होने चाहिए जो 6 हजार मीटर की ऊंचाई तक उड़ सकें। लेकिन उस वक्त तत्कालीन एयर मार्शल चीफ ने यह डील आगे नहीं बढ़ने दी थी क्योंकि डील के लिए केवल एक ही कंपनी मौजूद थी। इस प्रस्ताव के बाद एक और प्रस्ताव रखा गया। प्रधानमंत्री को सुरक्षा देने वाली एजेंसी ने कहा कि हेलिकॉप्टर की सीलिंग इतनी ऊंची होनी चाहिए कि उसके अंदर कोई व्यक्ति खड़ा हो सके। इन शर्तों को देखते हुए तीन कंपनियां आगे आईं, जिनमें से एक अगस्ता वेस्टेलैंड भी थी। 

साल 2004 में वाजपेयी सरकार के जाने के बाद सत्ता यूपीए सरकार के हाथों में आ गई। तब शशींद्र पाल त्यागी एयर चीफ मार्शल थे। मार्च 2005 में हेलिकॉप्टर के ऊंचा उड़ने की शर्त में भी बदलाव किया गया। पहले ये शर्त 6 हजार मीटर थी, जिसे बाद में 4500 मीटर कर दिया गया। 

दो कंपनियां को शॉर्टलिस्ट किया गया

इस सौदे को कई कंपनियां करना चाहती थीं लेकिन आखिर में केवल दो कंपनियों को ही चुना गया। एक कंपनी तो अगस्ता वेस्टलैंड ही थी जबकि दूसरी अमेरिका की कंपनी साइकोरस्की थी। इन हेलिकॉप्टर का ट्रायल अमेरिका और ब्रिटेन में हुआ। जो कि नियमों के खिलाफ था। इनका परीक्षण भारत में ही किया जाना चाहिए था।

वहीं हेलिकॉप्टर की संख्या को 8 से 12 करने के पीछे भी त्यागी का ही हाथ था। उन्होंने कहा था कि 12 हेलिकॉप्टर की आवश्यकता है। बताया जाता है कि इन सभी शर्तों पर अमेरिकी कंपनी साइकोरस्की खरी उतरी थी लेकिन बावजूद इसके साल 2007 में त्यागी के रिटायर होने तक सौदा अगस्ता के साथ लगभग पक्का हो चुका था। इसके करीब तीन साल बाद यानी साल 2010 में अगस्ता से सौदा किया गया। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक अगस्ता ऐसे हेलिकॉप्टर बनाती है जो 4500 मीटर से ऊंचे नहीं उड़ सकते। इसी वजह से पहले की ऊंचाई वाली शर्त को बदलकर कम किया गया।

सीबीआई ने त्यागी पर लगाया घूस लेने का आरोप

सीबीआई के अनुसार त्यागी ने दलाल के जरिए कंपनी से घूस लेकर सौदे में बदलाव किए थे। साल 2014 में प्रवर्तन निदेशायल ने चंडीगढ़ में फर्जी कंपनी चला रहे वकील गौतम खेतान को गिरफ्तार किया। उसपर घूस के पैसे कंपनी के खातों में डालने के आरोप लगे। बाद में पता चला कि खेतान के तार त्यागी से भी जुड़े थे। त्यागी पर आरोप लगा कि उन्हें दलाल हाश्के ने कई लोगों के माध्यम से घूस दी। जिनमें खेतान भी शामिल है। सितंबर में सीबीआई ने चार्टशीट दाखिल की। जिसके बाद दिसंबर में त्यागी को गिरफ्तार किया गया लेकिन उन्हें बाद में जमानत मिल गई।

गांधी परिवार कैसे जुड़ा?

इस मामले को गांधी परिवार से भी जोड़ा जा रहा है। इसकी वजह है बिचौलिए मिशेल द्वारा लिखा एक खत। जानकारी के मुताबिक उसने ये खत मार्च 2008 में अगस्ता के भारतीय प्रमुख को लिखा था। उसने कहा था कि सोनिया गांधी सौदे की ड्राइविंग फोर्स हैं और आगे से वह एन18 में उड़ान नहीं भरेंगीं। वहीं मिलान की एक अदालत ने अपने फैसले में बिचैलियों की जिस बात का जिक्र किया था, उसमें एपी और फैमिली जैसे शब्दों का भी इस्तेमाल किया गया। आरोप में कहा जा रहा है कि एपी का मतलब अहमद पटेल और फैमिली का मतलब गांधी परिवार है। 

हालांकि मिशेल लगातार कह रहा है कि सीबीआई ने उस पर पूछताछ के दौरान सोनिया का नाम लेने का दबाव बनाया था। पूर्व एयर चीफ मार्शल त्यागी भी सीबीआई द्वारा निर्दोषों के नाम लेने के दबाव की बात कह रहे हैं।