मोदी तुम अटल न बनना

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जब लेख लिखने बैठा तो बहुत से सवाल मेरे जहन में थे परन्तु दिमाग हमेशा अटल जी की इस बात को बार-बार दोहराता रहा “बोलता तो मैं बहुत अच्छा हूँ लेकिन वोट नहीं मिलते “ उनकी कही इसी बात ने मुझे ये टाइटल लिखने को मजबूर कर दिया, आखिर इस लेख की जरूरत भी क्यों आन पड़ी और क्या है इस लेख उद्देशय, ये बात तो सभी को मानना पड़ेगा अटल जी एक बहु आयामी बहु व्यक्तित्व के नेता ही नहीं एक साफ दिल के साफ छवि वाले व्यक्ति रहे छल कपट से दूर विशुद्ध राष्ट्रीयता की राजनीती उनका न सिर्फ एजेंडा रहा बल्कि उसको आत्मसात भी किया। विपक्ष में रहते हुए भी उन्होंने कभी राष्ट्रीय मुद्दों पर विचार अलग नहीं रखा बल्कि जब कभी भी देश की बात आई वो विपक्षी होने के बाबजूद सरकार के साथ खड़े दिखे पूरे राजनितिक जीवन में उन्होंने कभी देश के मुद्दों पर सरकार का साथ न दिया हो ऐसा शायद ही देखने को मिला हो।

अटल जी की व्यक्तित्व इसी बात को लेकर हमेशा याद किया जायेगा कि देश हित के लिए उन्होंने पार्टी हित को भी दरकिनार कर दिया, शायद ये ही वजह रही की वो 2004 का इलेक्शन नहीं जीत पाए उन्होंने हमेशा देश की राजनीती की वोट की नहीं, विपक्ष में होते हुए भी उनके द्वारा दिया गया भाषण उनकी इसी सोच को दर्शाता है। 2004 का इलेक्शन वो इसी लिए नहीं जीत पाए क्यूंकि उन्होंने वो गुण नहीं थे जो आज उनकी पार्टी के नेता नरेंद्र मोदी में है मोदी उनकी राष्ट्रभक्ति को तो फॉलो करते है लेकिंग अपने वोट बैंक पर भी हमेशा ध्यान रखते हैं जो शायद अटल जी न कर सके, 2004 की हार ने न सिर्फ बीजेपी को सबक दिया बल्कि वो अब उस गलती को दोहराना भी नहीं चाहती।

जहाँ अटल जी सिर्फ 1 वोट से सदन में विश्वास मत से हार मान बैठ जाते है परन्तु अभी का बीजेपी नेतृत्व 1 -1 सीट और एक वोट के लिए लड़ रहा चाहे वो राज्य सभा हो या कोई भी प्रादेशिक सभा, उनका साफ उद्देश्य है जब तक आप सत्ता तक नहीं पहुंचेंगे आपके काम की कोई पहचान नहीं होगी। इसी कारण आज का बीजेपी नेतृत्व हर उस ओहदे पर पहुंचना चाहता है जिसका वो पूर्ण माददा रखता है आज नेतृत्व उस तरह नहीं जो 1 वोट से हार मानकर बैठ जाये इसी कारण वो सिर्फ एक-दो राज्य नहीं 20 राज्यों में अपनी सरकार बनाने में कामयाब हुए और उस गलती को बिलकुल नहीं दोहराना चाहते जो उन्होंने 2004 में में की। मजबूत नेतृत्व के साथ बीजेपी आज इसी लिए खड़ी हिअ क्यूंकि वो अटल नहीं बनना चाहती।