भारत में अल्पसंख्यकों को मिलती है सबसे ज्यादा सुविधाएं : अमेरिकी फाउंडेशन की रिपोर्ट

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वाशिंगटन: अमेरिका स्थित एक हिंदू अधिकार समूह की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत सरकार धार्मिक अल्पसंख्यक आबादी को ‘अभूतपूर्व’ सुविधाएं देती है. समूह के मुताबिक भारतीय क्षेत्र में स्थिरता के लिये यह एक बड़ी वजह है. हिंदू अमेरिकन फाउंडेशन (एचएएफ) ने ‘भारत: विविधता में लोकतंत्र’ शीर्षक वाले अपने हालिया संक्षिप्त नीति विवरण में कहा कि क्षेत्र में व्यापक स्थायित्व लाने और कट्टरपंथी इस्लामी तथा कम्युनिस्ट/माओवादी आतंकवाद को लगाम लगाने के लिये यह कितना जरूरी है और इसे इस बात से समझा जा सकता है कि अमेरिका लगातार भारत के साथ अपने रिश्तों को मजबूत बना रहा है.

इस हफ्ते अमेरिकी संसद की ऐतिहासिक इमारत में जारी किये गए इस नीतिगत दस्तावेज में भारत के सदियों पुराने बहुधर्मी और बहुजातीय दर्जे को रेखांकित करने के साथ ही राष्ट्र राज्य के उसके महत्व को भी दर्शाया गया है. इसके साथ ही दस्तावेज में यह भी कहा गया है कि भारत दुनिया के चार प्रमुख धर्मों की जन्मस्थली है और कई दूसरे धर्मों व जातियों के लिये शरणस्थली भी.

रिपोर्ट में इस बात का भी विस्तार से जिक्र है कि कैसे भारत सरकार ने ‘अपनी धार्मिक अल्पसंख्यक आबादी को अभूतपूर्व सुविधाएं दीं’. वर्ष 2016-17 में इन्हें 60 करोड़ अमेरिकी डॉलर से ज्यादा की योजनाओं से लाभान्वित किया गया.

मालूम हो कि भारत के लिए यह रिपोर्ट इसलिए खास है, क्योंकि दुनिया के कई नेता हिन्दुस्तान की छवि खराब करने को लेकर बयान देते रहे हैं. साल 2009 और 2015 में तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने कहा था कि भारत अल्पसंख्यकों के लिए सुरक्षित नहीं है. उनके इस बयान के चलते दुनिया में भारत की बदनामी हुई थी. इसके अलावा चीन और पाकिस्तान भी अल्पसंख्यकों को लेकर भारत के खिलाफ बयानबाजी करता रहता है.

साल 2014 में अभिनेता आमिर खान ने कहा था कि भारत में असहिष्णुता है. उनके इस बयान के बाद देश के भीतर और बाहर सरकार के प्रति विरोध के स्वर उठने लगे थे. आलम यह था कि कई लोगों ने असहिष्णुता वाले बयान के पक्ष में अपने सरकारी अवॉर्ड लौटा दिए थे. हालांकि कुछ दिनों बाद ही ये मामला शांत पड़ गया था. यूपी के दादरी में अखलाक और हाल ही में राजस्थान के अलवर में भीड़ के हाथों रकबर की मौत की घटना को अल्पसंख्यकों की असुरक्षा से जोड़कर देखा जा रहा है. जबकि सरकार ने साफ तौर से कहा है कि यह कानून का मामला है, इसे अल्पसंख्यक से जोड़ना ठीक नहीं है.